धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—925

एक बार एक युवक एक संत के पास पहुँचा। उसके चेहरे पर उदासी थी। उसने कहा, “गुरुदेव, जब तक मेरे पास धन और पद था, लोग मेरे आगे-पीछे घूमते थे। आज मुश्किल समय आया तो वही लोग मुँह फेरकर चले गए। क्या दुनिया में सच्चा साथ किसी का नहीं होता?” संत उसे आश्रम के पीछे लगे एक पुराने बरगद के पेड़ के पास ले गए। उस समय पतझड़ का मौसम था। तेज हवा चल रही थी और सूखे पत्ते एक-एक करके जमीन पर गिर रहे थे।

संत ने पूछा, “बेटा, क्या देख रहे हो?”

युवक बोला, “पेड़ के पत्ते उसे छोड़कर जा रहे हैं।”

संत मुस्कुराए और बोले, “जरा ध्यान से देखो। पत्ते मौसम के साथ अपना रंग बदलते हैं। जब तक हरे रहते हैं, पेड़ की शोभा बढ़ाते हैं। मौसम बदला नहीं कि पीले पड़ गए और हवा का साथ पकड़कर चले गए।”

युवक बोला, “हाँ, बिल्कुल वैसे ही जैसे स्वार्थी लोग अवसर देखकर साथ बदल लेते हैं।”

संत ने पेड़ की जड़ की ओर इशारा करते हुए कहा, “लेकिन क्या तुमने जड़ को देखा? वह कभी पेड़ का साथ नहीं छोड़ती। गर्मी हो, सर्दी हो, आँधी आए या तूफान, जड़ धरती के भीतर रहकर पेड़ को संभाले रखती है।” युवक चुप हो गया।

संत बोले, “जीवन में दो तरह के लोग मिलते हैं। कुछ पत्तों की तरह होते हैं। वे तुम्हारे सुख, संपत्ति और सफलता के मौसम में तुम्हारे साथ रहते हैं। जैसे ही कठिन समय आता है, रंग बदल लेते हैं और उड़ जाते हैं।”

“लेकिन कुछ लोग जड़ की तरह होते हैं। वे दिखाई कम देते हैं, दिखावा भी नहीं करते, पर संकट आने पर पूरी ताकत से तुम्हें थाम लेते हैं। माता-पिता, सच्चे मित्र, जीवनसाथी और कुछ निष्काम शुभचिंतक अक्सर जड़ की तरह होते हैं।”

युवक ने पूछा, “गुरुदेव, फिर हमें किसकी चिंता करनी चाहिए?”

संत ने पेड़ के तने पर हाथ रखते हुए कहा, “पेड़ कभी गिरते पत्तों के पीछे नहीं भागता। उसे विश्वास होता है कि उसकी जड़ें मजबूत हैं तो नए पत्ते फिर आ जाएँगे। जो लोग स्वार्थ से चले जाएँ, उनके पीछे अपना समय और सम्मान मत खोओ। अपनी जड़ों को मजबूत करो—सत्य, संस्कार, परिवार, परिश्रम और ईश्वर पर विश्वास।”

इतने में हवा का एक तेज झोंका आया। कई पत्ते उड़ गए, लेकिन विशाल बरगद अपनी जगह अडिग खड़ा रहा।

संत बोले, “याद रखो, मौकापरस्त लोग पत्तों की तरह ऋतु देखकर रंग बदलते हैं और साथ छोड़ देते हैं। बुद्धिमान व्यक्ति पत्तों के जाने से दुखी नहीं होता, क्योंकि उसका रिश्ता जड़ों से होता है। जड़ें मजबूत हों तो पतझड़ के बाद फिर से हरियाली लौट आती है।”

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, जीवन में पत्तों की संख्या नहीं, जड़ों की मजबूती मायने रखती है। स्वार्थी लोगों के जाने का शोक मत करो; उन रिश्तों को सँजोओ जो कठिन समय में भी तुम्हारे साथ खड़े रहते हैं।

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Jeewan Aadhar Editor Desk