हिसार

आदमपुर—जवाहर नगर को दो हिस्से में बांटने की तैयारी, ऐतिहासिक गोलटंकी व गुरुद्वारा गली हो जाएगी बंद

मंडी आदमपुर,
आदमपुर रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण क्षेत्र के भौगोलिक ढांचे के लिए ही खतरा बन गया है। आधुनिकीकरण के चलते रेलवे जवाहर नगर की तरफ का प्लेटफार्म ऊंचा उठाने के साथ—साथ दिवार भी निकाल रहा है। रेलवे विभाग यह दिवार प्लेटफार्म के साथ निकाल देता तो आदमपुर क्षेत्र के लिए काफी शानदार रहता। लेकिन विभाग ने इस दिवार को प्लेटफार्म के बाद आने वाली सड़क के बाद निकालना आरंभ कर दिया। इससे आदमपुर क्षेत्र का पूरा भौगोलिक ढांचा ही बदल दिया।

जेल बन जाएगा जवाहर नगर
इस दिवार के कारण जवाहर नगर का वर्तमान अस्तित्व करीब—करीब समाप्त ही होने की कगार पर पहुंच गया है। जवाहर नगर को मंडी आदमपुर से जोड़ने के लिए चार गलिया प्रमुख है। इन चार गलियों में लाला सदानंद ग्रोवर वाली गली, कुम्हारों वाली गली, गुरुद्वारा गली और गोलटंकी वाली गली शामिल है। रेलवे स्टेशन की दिवार से इन चारों गलियों को बंद किया जा रहा है। यदि ये गलियां बंद ही जाती है तो जवाहर नगर से बाहर निकलने के लिए केवल दो ही सड़के बचती है। करीब 7 हजार की आबादी के प्रवेश व निकासी के लिए दो ही गलियां बचने से यह क्षेत्र किसी जेल की भांति हो जाएगा।

जनप्रतिनीधियों की बेरुखी
जवाहर नगर की इस गंभीर समस्या को लेकर अब तक जनप्रतिनीधियों में बेरुखी देखने को मिली है। कुलदीप बिश्नोई से लेकर सांसद जयप्रकाश व विधायक चंद्रप्रकाश ने इस दिवार को रुकवाने के लिए कुछ भी नहीं किया। इन जनप्रतिनीधियों ने अब तक मौके पर आकर लोगों की मुख्य समस्या तक जानने की कोशिश नहीं है। इनकी इस बेरुखी के ​चलते लोगों में अब रोष फैलने लगा है। लोगों का कहना है कि यदि इन तीनों नेताओं में से एक ने भी रुचि दिखाई होती तो यह दिवार प्लेटफार्म के साथ निकलती।

गुरुद्वारा संगत में नराजगी
आदमपुर क्षेत्र में केवल एक ही गुरुद्वारा है। सन 1968 से स्थापित इस गुरुद्वारे के प्रति सिख, पंजाबी के अलावा हर वर्ग के लोगों की आस्था है। यदि यह दिवार नहीं रुकती है इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे की मुख्य गली ही बंद हो जाएगी। ऐसे में यह न केवल आस्था पर गहरी चोट होगी बल्कि समय—समय पर यहां से निकलने वाली शोभा यात्रा भी पूर्ण रुप से प्रभावित होगी। पंजाबी सभा के प्रधान राजन ग्रोवर व जगदीश पटवारी का कहना है कि सरकारी नुमाइंदों व रेलवे प्रशासन को श्रद्धाओं की श्रद्धा को देखते हुए इस गली पर दिवार निकालने की जगह भव्य गेट लगाना चाहिए ताकि ऐतिहासिक गुरुद्वारा के म​हत्व का पता आने वाली पीढ़ियों को भी लगता रहे।

गोलटंकी है जवाहर नगर की पहचान
गोलटंकी जवाहर नगर के अस्तित्व की पहचान है। इसी गोलटंकी पर किसी समय पूर्व सीएम चौ.भजनलाल, चौ.देवीलाल व सुरेंद्र सिहं जैसे नेता सभाओं का आयोजन करते थे। इस दिवार के कारण गोलटंकी गली का अस्तित्व मिटाने की कोशिश की जा रही है। गोलटंकी वाली गली ही मुख्य रुप से मंडी आदमपुर व जवाहर नगर को जोड़ने का काम करती है। इस गली में न केवल जवाहर नगर का मुख्य बाजार है बल्कि यहां पर 65—70 साल पुराना बाबा रामदेवजी का मंदिर हजारों श्रद्धाओं की आस्था का भी प्रतीक है। समाजसेवी संजयसोनी रेलवे प्रशासन को पत्र लिख मांग की थी कि गोलटंकी वाली के प्लेटफार्म पर जवाहर नगर ​के लोगों के लिए टिकट घर बनाया जाएं और इस गली पर रेलवे का भव्य गेट बनाकर जवाहर नगर ग्राम पंचायत के लोगों को उचित सम्मान दिया जाएं।

पानी—सिवर सब दिवार के उस पार
दिवार को लेकर धरना दे रहे लोगों का कहना है रेलवे प्लेटफार्म व जवाहर नगर के बीच बीएंडआर की सड़क है। इस सड़क पर जवाहर नगर के लोगों के सिवर व पेयजल के कनैक्शन 1974 से चल रहे है। ऐसे में यह दिवार यदि नहीं रुकती है तो लोगों के कनैक्शन दिवार के उस तरफ चले जायेंगे। ऐसे में सिवर रुकने या नया पेयजल कनैक्शन लेने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। भाजपा नेता मुनीश ऐलावादी का कहना है कि रेलवे प्रशासन को यह दिवार बीएंडआर द्वारा बनाई गई सड़क को छोड़कर निकालनी चाहिए। जवाहर नगर के प्रमुख नेता सुभाष धांधल, कमल हैप्पी चोपड़ा, कमलेश मल्हौत्रा, पूर्व सरपंच प्रतीम सिंह सरदार,जेपी पाहवा, औमप्रकाश कनवाडिया, सरोज बाला, गुलशन खेतरपाल, डा.नंद चावला, ईश्वर यादव, डा.हरभगवान छिंपा, पूनम सिंह ठाकर, रामू सोनी, सुभाष खेतरपाल,शहाबुद्दिन कुरैसी, भूपसिंह, शिव शर्मा, एडवोकेट पवन राड बिश्नोई आदि का कहना है कि इस दिवार के कारण करीब 5 दर्जन मकानों का निकास ही बंद हो जाएगा। रेलवे प्रशासन को विकास के नाम पर विनाश करने से बचना चाहिए।

अंडरपास बनावाएं रेलवे
सरपंच पद के चुनाव लड़ चुकी नीलम धांधल, तारारानी व कमलेश मल्हौत्रा का कहना है कि मंडी आदमपुर व जवाहर नगर का थाना एक है। ऐसे में यदि जवाहर नगर में कोई आपराधिक घटना घटित हो जाती है तो पुलिस के पास तुरंत यहां पहुंचने का कोई रास्ता ही बचता। ऐसे में रेलवे प्रशासन को दिवार निकालने से पहले भादरा फाटक के नीचे से अंडरपास बनान चाहिए। यहां के निवासी बलवीर सोबती, मा.सतबीर खिचड़, राजकुमार ग्रोवर, बालकिशन ऐलावादी, विक्की वासन, गुलशन गुल्ला, भूषण मोंगा का कहना है कि जवाहर नगर का अस्तित्व मंडी आदमपुर के बसने से पहले का है। ऐसे में रेलवे प्रशासन की एक दिवार से यदि इस क्षेत्र का अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर है तो जनप्रतिनिधियों को मौके पर आकर इसी सूध लेनी चाहिए। इन लोगों का कहना है कि यह क्षेत्र पूरी तरह से मध्यम वर्ग व गरीब वर्ग से संबंधित है। ऐसे में राज्य सरकार को भी इस तरफ संज्ञान लेते हुए रेलवे प्रशासन से बात करके समस्या का हल निकालना चाहिए।

हजारों युवा करते है रेल से सफर
रवि मोंगा, संजय कामरा, नितीन चावला, साक्षी शर्मा, कविता बिश्नोई, मिनाक्षी आदि ने बताया कि जवाहर नगर से रोजाना करीब 800—900 युवा शिक्षा व रोजगार के लिए रेलवे से हिसार—सिरसा का सफर करते हैं। ऐसे में यदि दिवार से सभी मुख्य गलियों का बंद कर दिया जाएगा तो युवाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। इनका कहना है कि जवाहर नगर का अपना कोई बस स्टैंड नहीं है। बस पकड़ने के लिए मंडी आदमपुर के बस स्टैंड पर जाना होता है। यदि यह दिवार निकल गई तो बस स्टैंड जाने के लिए करीब 5 किलोमीटर तक सफर तय करना पड़ेगा जोकि काफी परेशानीभरा होगा। वहीं यदि माडल टाउन, अनाज मंडी, मेन बजार, शिवकॉलोनी से किसी युवा को कॉलेज,आईटीआई, पॉलिटेकनिक संस्था में आना पड़ा तो उनको 5 से 6 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा।
कुल मिलाकर रेलवे प्रशासन की एक दिवार ने आदमपुर क्षेत्र का भौगोलिक ढांचे को बुरी तरह से बिगाड़ दिया है। जनता परेशान है और चिल्ला रही है— लेकिन जनप्रतिनीधियों की कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। लोग चिलचिलाती गर्मी में धरने पर बैठे हैं लेकिन यहां के नेताओं को मौके पर आकर सूध लेने की फुर्सत तक नहीं।

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Jeewan Aadhar Editor Desk