पुराने समय एक महिला रोज अपने घर के पास के मंदिर में पूजा करने जाती थी। वह बहुत नियम से भक्ति करती थी और भगवान में उसकी गहरी आस्था थी, लेकिन धीरे-धीरे उसके मन में एक बात घर करने लगी कि मंदिर में आने वाले कई लोग सिर्फ दिखावा करते हैं। कुछ लोग पूजा के समय भी आपस में बातें करते रहते हैं, जिससे माहौल भक्ति वाला नहीं लगता।
एक दिन वह महिला बहुत परेशान होकर मंदिर के पुजारी के पास गई और बोली, “मैं अब इस मंदिर में नहीं आना चाहती। यहां लोग भगवान की भक्ति नहीं करते, बस दिखावा करते हैं और व्यर्थ बातें करते हैं।”
पुजारी ने शांति से उसकी बात सुनी। वह उस महिला को अच्छी तरह जानते थे, क्योंकि वह वर्षों से मंदिर आ रही थी। उन्होंने पूछा, “क्या आप ने सच में यह सब देखा है?”
महिला ने कहा, “हां, मैंने देखा है और मुझे अच्छा नहीं लगता।”
पुजारी मुस्कुराए और बोले, “ठीक है, अगर आपका मन नहीं है तो मत आना, लेकिन इससे पहले मेरा एक छोटा सा काम कर दो।”
महिला ने कहा, “बताइए क्या करना है?”
पुजारी ने उसे एक गिलास दूध दिया और कहा, “इस गिलास को लेकर मंदिर की दो परिक्रमा करो, लेकिन ध्यान रहे कि एक भी बूंद दूध जमीन पर न गिरे।”
महिला ने दूध का गिलास लिया और धीरे-धीरे चलने लगी। वह बहुत सावधानी से चल रही थी कि उसका पूरा ध्यान सिर्फ दूध पर था। वह इधर-उधर बिल्कुल नहीं देख रही थी। मंदिर के लोग क्या कर रहे हैं, कौन क्या बोल रहा है- उसने कुछ भी नहीं देखा-सुना।
दो परिक्रमा पूरी करने के बाद वह वापस पुजारी के पास पहुंची। पुजारी ने पूछा, “क्या आप ने देखा कि मंदिर में कौन क्या कर रहा है? क्या किसी व्यक्ति की बातों ने आपको परेशान किया?”
महिला ने कहा, “नहीं, मेरा पूरा ध्यान तो दूध पर था। मैं कुछ और देख-सुन ही नहीं पाई।”
पुजारी मुस्कुराए और बोले, “यही तो सीख है। जब आप ने ध्यान सिर्फ एक काम पर लगाया, तो बाकी सब चीजें महत्वहीन हो गईं। इसी तरह जब हम पूजा करते हैं, तो हमें भी पूरा ध्यान भगवान पर रखना चाहिए। अगर मन इधर-उधर भटकेगा, तो पूजा का पूरा फल नहीं मिलेगा।”
महिला को अपनी गलती समझ आ गई। उसने निश्चय किया कि अब वह दूसरों की ओर ध्यान नहीं देगी और केवल भक्ति पर ध्यान लगाएगी।
धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, जब हम एक साथ कई काम करने की कोशिश करते हैं, तो हमारा ध्यान टूट जाता है। बेहतर है कि एक समय पर एक ही काम करें और उसे पूरी लगन से पूरा करें, तभी सफलता मिल सकती है।








