मंडी आदमपुर,
मंडी आदमपुर ग्राम पंचायत को काफी सालों के बाद फिर से सरपंच मिल गया। सरपंच पद के लिए चुनाव में जगतपाल अग्रवाल को बड़ी सफलता मिली है। वहीं लक्ष्मी देवी के बेटे मोहित गोयल को अपने पहले चुनाव में निराशा हाथ लगी। जगदीश भादू का प्रचार—प्रसार काफी दमदार रहा लेकिन वे इसे वोट में तबदील करने में असफल रहे, वे दूसरे नम्बर पर रहे।। राकेश जांगड़ा के युवाओं को इस चुनाव पहचान तो मिली लेकिन जीत नहीं।
चुपचाप कर दिखाया कमाल
जगतपाल अग्रवाल ने ये चुनाव पूर्व सरपंच व अपने स्वर्गीय पिताश्री सुभाष अग्रवाल के नाम व काम पर लड़ा। जगतपाल अग्रवाल ने इस चुनाव में ना कोई ज्यादा तामझाम किया और न किसी प्रकार सभा की। अंतिम पल में होने वाले शक्ति प्रदर्शन से भी पूरी तरह परहेज किया। इस दौरान विपक्षियों ने उन पर कई प्रकार के शाब्दिक हमले किए लेकिन उन्होंने किसी भी शाब्दिक हमले का जवाब ना देकर चूपचाप अपना काम किया। उनकी ये कार्यप्रणाली लोगों को पसंद आई और वोट देकर सरपंच पद की कुर्सी सौंप दी।
सफलता मिली सौम्यता को
इस चुनाव में असफलता पाने वाले दो उम्मीदवारों ने स्वयं को दबंग दिखाने का प्रयास किया। अधिकारियों से दबंगता से काम करवाने की हुंकार भरी। वहीं जगतपाल अग्रवाल ने दबंगता का जवाब सौम्यता से दिया। उनका कहना था कि विकास कार्य प्रेम—प्यार—स्नेह से करवाया जायेगा। उनका ये सौम्य स्वभाव को लोगों ने पसंद किया और जमकर सौम्यता को वोट किए।
रणनीति से लड़ा चुनाव
जगतपाल अग्रवाल के एक विशेष रणनीति से चुनाव लड़ा। तामझाम की जगह उन्होंने अकेले प्रचार करना आरंभ किया। इसके बाद हर वार्ड का मैंबर का चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों पर ध्यान दिया। जो मैंबर्स निर्विरोध चुने गए उन्हें अपने साथ जोड़ा और उन्हें वार्ड की जिम्मेदारी दी। ये मैंबर्स ही अपने—अपने वार्ड के मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक जगतपाल अग्रवाल तक खींचकर लाएं।









