धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से— 897

पुराने समय में एक राज्य का राजा बूढ़ा हो चुका था। उसके पास धन, शक्ति, सुख-सुविधाएं सब कुछ था, लेकिन एक चिंता उसे भीतर ही भीतर खाए जा रही थी, उसकी कोई संतान नहीं थी। उसे डर था कि उसके बाद राज्य का क्या होगा और कौन प्रजा की सही तरीके से देखभाल करेगा। इसी चिंता में उसने अपने गुरु से सलाह मांगी।

गुरु ने कहा, “राजन्, योग्य व्यक्ति खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि अपने गुणों और धैर्य से पहचाना जाता है। आपको अपनी प्रजा में से ही किसी योग्य इंसान को उत्तराधिकारी चुनना चाहिए।” गुरु ने सही व्यक्ति का चयन करने का तरीका भी राजा को समझाया।

राजा को यह बात उचित लगी। उसने तुरंत मंत्री को आदेश दिया कि पूरे राज्य में घोषणा करवा दी जाए- “जो व्यक्ति कल सूर्यास्त से पहले राजमहल पहुंचकर राजा से मिलेगा, उसे राज्य का अगला उत्तराधिकारी बनाया जाएगा।”

यह समाचार पूरे राज्य में आग की तरह फैल गया। हर कोई राजा बनने का सपना देखने लगा। अगले दिन सुबह से ही हजारों लोग राजमहल की ओर चल पड़े, लेकिन महल के बाहर राजा ने एक विशाल मेले का आयोजन करवाया था।

उस मेले में हर तरह के आकर्षण मौजूद थे। कहीं स्वादिष्ट पकवानों की खुशबू लोगों को रोक रही थी, कहीं नाच-गाने का आनंद लोगों को बांध रहा था। कई लोग खेलों में व्यस्त हो गए, तो कुछ शराब और मनोरंजन में खो गए। धीरे-धीरे लोग अपने असली उद्देश्य को भूलने लगे। वे वहीं रुककर आनंद लेने लगे और सोचने लगे कि थोड़ी देर बाद महल चले जाएंगे।

इसी भीड़ में एक साधारण युवक भी था। उसने मेले को देखा, लोगों की भीड़ देखी, लेकिन उसके मन में सिर्फ एक बात थी- “मुझे अपने लक्ष्य तक पहुंचना है।” उसने न खाने की ओर ध्यान दिया, न मनोरंजन की ओर। वह लगातार महल की ओर बढ़ता गया।

महल के मुख्य द्वार पर पहरेदारों ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन युवक ने हार नहीं मानी। उसने साहस और बुद्धिमानी से आगे बढ़ते हुए राजा के महल तक पहुंचने का रास्ता बना लिया।

जब वह राजा के सामने पहुंचा, तो राजा मुस्कुराया और बोला, “मुझे ऐसे ही व्यक्ति की तलाश थी, जो रास्ते के प्रलोभनों में फंसकर अपना लक्ष्य न भूल जाए।” उसी क्षण राजा ने उस युवक को राज्य का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, जीवन में सफलता उन्हीं लोगों को मिलती है, जो कठिनाइयों और आकर्षणों में उलझे बिना लक्ष्य की ओर बढ़ते रहते हैं। जिस व्यक्ति को यह पता है कि उसे कहां पहुंचना है, वही सही दिशा में आगे बढ़ता है। यदि लक्ष्य स्पष्ट नहीं होगा, तो इंसान छोटी-छोटी चीजों में उलझ जाएगा। इसलिए जीवन में अपना उद्देश्य तय करें और उसी पर ध्यान केंद्रित रखें।

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