खेत—खलिहान हिसार

युवा किसान कर रहे है खेती में नए—नए प्रयोग, पराली प्रबंधन को लेकर गंगवा के संदीप ने कर दिया कमाल

हिसार,
एक तरफ जहां किसानों द्वारा धान की पराली को जलाने को लेकर केन्द्र व राज्यों की सरकारें वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विचारों से प्रभावित होकर खेती की तरफ रूख करने वाले गांव गंगवा के एक पढ़े लिखे किसान इंजीनियर संदीप ने अपनी लाखों रुपए की नौकरी की बजाय खेती – किसानी को चुना, वो न केवल पराली प्रबंधन बल्कि फसलो के सब प्रकार के अवशेषों का प्रबंधन करके उससे देशी यानि ऑर्गेनिक खाद तैयार करने मे प्रयोग करते हैं। ऑर्गेनिक खाद को बेचकर भी किसान अच्छा मुनाफ़ा कमा सकता है, साथ ही पर्यावरण को पराली के जलाने से उत्पन्न होने प्रदूषण से फ़ैलने वाली जहरीली हवाओ से बचाया जा सकता है। इसके लिए वो दूसरे किसानों को भी प्रेरित करते हैं। स्कूली प्रतियोगिता.. प्ले ग्रुप से दसवीं तक विद्यार्थी और स्कूल दोनों जीतेंगे सैंकड़ों उपहार.. अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करे
जीरो बजट प्राकृतिक कृषि शुरू की
बड़े – बड़े कृषि विशेषज्ञों की टीम पराली प्रबंधन पर रिसर्च कर रही है और उपाय निकालने मे लगी है, मगर प्रगतिशील किसान संदीप ने प्रधानमंत्री मोदी से प्रभावित होकर 25 एकड़ में जीरो बजट प्राकृतिक कृषि शुरू कर दी है, 2 एकड़ में खुद के घर खाने के लिए प्राकृतिक खेती वो 3 साल से कर रहे हैं, इस बार बड़े स्तर पर प्राकृतिक रूप से खेती कर जहर मुक्त खाना देना चाहते हैं

मूल मंत्र
इंजीनियर संदीप का कहना है कि खेत में उत्पन्न होने वाली हर चीज लाभदायक है। बशर्ते हमे उसका उपयोग करना आना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान अपने खेतो को कोसने की बजाय प्रेम करे और जिस तरह से कर्मचारी अपना समय दफ्तर मे लगाता है उसी तरह किसान भी कम से कम हर रोज 8 घंटे खेत मे लगाए तो खेती में भी मुनाफा अपने आप आएगा। नौकरी करना चाहते है, तो यहां क्लिक करे।
किसानों को कर रहे प्रेरित
किसानों को वाहट्सअप, फेसबुक पर ऑर्गेनिक के ग्रुप व पेज के माध्यम से और खुद खेत में आने वाले किसानों को भी इसके बारे प्रैक्टिकल रूप से खेती करने के उपाय बता कर उनको प्रेरित करते हैं।
कैसे करते हैं पराली से देशी खाद तैयार
इंजीनियर संदीप ने बताया कि पराली व खेत के अन्य अवशेषों को गड्डे में डालकर, उसके ऊपर गाय या भैंस सहित किसी अन्य पशु का गोबर डाल कर उसके ऊपर बालू मिट्टी डाली जाती है और उसमें निरंतर पानी का रिसाव किया जाता है। इससे 6 माह में खाद भी तैयार हो जाती है और फसल के अवशेषों का भी प्रबंधन हो जाता है।
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Jeewan Aadhar Editor Desk