धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—735

हिमालय की तलहटी में एक प्राचीन आश्रम था, जहाँ एक वृद्ध संत “आत्मबोधी” अपने शांत स्वभाव और गहरे ज्ञान के लिए प्रसिद्ध थे। दूर-दूर से लोग अपनी परेशानियाँ लेकर उनके पास आते और हल पाते।

एक दिन एक युवक आश्रम पहुँचा। चेहरा थका हुआ, मन उदास, और आँखों में बेचैनी। उसने संत के चरणों में सिर झुकाया और बोला, “गुरुदेव, मेरा मन कभी शांत नहीं रहता। मैं मेहनत भी करता हूँ, पर जीवन बिगड़ता जा रहा है। कृपा बताइए कि मेरी बर्बादी की जड़ क्या है?”

संत मुस्कुराए और बोले, “बेटा, चलो नदी किनारे चलते हैं। वहाँ मैं तुम्हें तुम्हारी समस्या का उत्तर दूँगा।”

दोनों शांत नदी तक पहुँचे। संत ने तीन काले पत्थर उठाए और युवक के सामने रख दिए।

पहला पत्थर — ‘काम’ (अत्यधिक वासनाएँ)

संत बोले, “इस पत्थर को उठाओ।”
युवक ने उठाया — भारी था।
संत बोले, “यह काम का भार है। इच्छाएँ आवश्यक हैं, पर जब इच्छा ‘अत्यधिक’ बन जाती है, तो इंसान अपने लक्ष्य से भटक जाता है। वासनाएँ मन को बाँध लेती हैं…और मन बँध जाए, तो आत्मा कमजोर हो जाती है।”

दूसरा पत्थर — ‘क्रोध’

संत ने दूसरा पत्थर उठाने को कहा। यह पहले से भी भारी था।

संत बोले, “क्रोध वह आग है जो पहले मनुष्य को ही जलाती है, बाद में दूसरों को। क्रोधित व्यक्ति न सही बोल पाता है, न सही सोच पाता है। क्रोध आत्मा की शांति नष्ट कर देता है —
और बिना शांति का जीवन किसी नरक से कम नहीं।”

तीसरा पत्थर — ‘लोभ’

अब संत ने तीसरा पत्थर उठाने को कहा। युवक ने कोशिश की, पर उठा न सका।

संत बोले, “यही लोभ है — जितना मिलता है, उससे ज्यादा की भूख। लोभ इंसान की दृष्टि छीन लेता है। उसे दूसरों का सुख दिखाई नहीं देता और स्वयं का संतोष खो देता है। लोभी व्यक्ति चाहे महलों में भी रहे —पर भीतर से हमेशा दरिद्र बना रहता है।”

संत का अंतिम वचन

संत ने तीनों पत्थरों को नदी में फेंकते हुए कहा— “बेटा, ये तीन पत्थर ही नरक के तीन द्वार हैं — काम, क्रोध और लोभ। जिसने इन्हें पकड़ा, वह डूबा; जिसने इन्हें छोड़ा, वह तैरा।”

युवक की आँखें नम हो गईं। उसने अपने हृदय पर हाथ रखा और बोला— “गुरुदेव, आज समझ गया कि मेरा शत्रु बाहर नहीं, मेरे भीतर ही बैठा था। आज से मैं इन तीन द्वारों से दूर रहकर ही जीवन जीऊँगा।”

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, “जब मन स्वच्छ होगा, तभी आत्मा उज्ज्वल होगी। याद रखो— जो स्वयं को जीत लेता है, वही संसार जीत लेता है।”

Shine wih us aloevera gel

Related posts

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—363

Jeewan Aadhar Editor Desk

ओशो : कृष्ण स्मृति

परमहंस स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—22

Jeewan Aadhar Editor Desk