एक बार एक युवक सफलता पाने की आकांक्षा लेकर एक संत के पास गया। उसने कहा— “गुरुदेव, मैं जीवन में आगे बढ़ना चाहता हूँ, पर समझ नहीं आता कि कौन-सा मार्ग सही है।”
संत मुस्कुराए और उसे अपने साथ आश्रम के पीछे ले गए। वहाँ चार पत्थरों की एक सीढ़ी बनी थी। संत ने कहा— “बेटा, सफलता की ओर जाने वाली हर सीढ़ी इन चार पत्थरों पर टिकती है— अनुशासन, विद्या, अच्छे विचार और संस्कार।”
युवक ने पूछा, “गुरुदेव, ये चारों इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?”
संत ने पहले पत्थर पर हाथ रखा—
1. अनुशासन (Discipline)
“अनुशासन वह शक्ति है जो मनुष्य को हर दिन सही दिशा में आगे बढ़ाती है।
जैसे नदी अपनी धारा के अनुशासन से समुद्र तक पहुँती है, वैसे ही जीवन का अनुशासन हमें लक्ष्य तक ले जाता है।”
2. विद्या (Knowledge)
दूसरे पत्थर पर हाथ रखते हुए संत बोले— “विद्या वह प्रकाश है जो अंधकार को मिटा देता है। जिसके पास ज्ञान है, उसके लिए रास्ता चाहे कैसा भी हो, वह रास्ता बना लेता है।”
3. अच्छे विचार (Positive Thoughts)
तीसरे पत्थर को छूकर कहा—“मन के विचार बीज की तरह होते हैं। जैसे बीज अच्छा हो तो फल भी अच्छा मिलता है, वैसे ही अच्छे विचार हमें ऊँचे कर्मों और महान सफलताओं तक ले जाते हैं।”
4. संस्कार (Values)
अंतिम पत्थर पर हाथ रखते हुए संत शांत स्वर में बोले— “संस्कार मनुष्य का वास्तविक धन है। विद्या और शक्ति तो दुरुपयोग भी हो सकती है, पर जिसके भीतर संस्कार हों, वह कभी गलत रास्ते पर नहीं जाता और संसार का विश्वास जीत लेता है।”
संत ने युवक से कहा— “अगर तुम इन चारों को जीवन का आधार बना लो, तो सफलता तुम्हारे पीछे चलेगी, तुम्हें ढूँढती फिरती रहेगी।”
युवक ने संत के चरणों में सिर झुकाया। उस दिन से उसने इन चार सीढ़ियों को अपने जीवन में उतार लिया— और सचमुच, कुछ ही वर्षों में वह अपने क्षेत्र का श्रेष्ठ व्यक्ति बन गया।
धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, अनुशासन दिशा देता है। विद्या प्रकाश देती है। अच्छे विचार शक्ति देते हैं। और संस्कार जीवन को ऊँचाई देते हैं। इन्हें अपना लो, सफलता निश्चित है।








