धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—914

एक दिन एक शिष्य अपने गुरु के पास गया। उसने विनम्रता से कहा, “गुरुजी, मैं जीवन में कामयाब बनना चाहता हूं। कृपया मुझे सफलता का रास्ता बताइए।”

गुरु मुस्कुराए और बोले, “मैं तुम्हें सफलता का रहस्य जरूर बताऊंगा, लेकिन पहले तुम मेरी बकरी को खूंटे से बांध दो।”

इतना कहकर गुरुजी ने बकरी की रस्सी शिष्य के हाथ में दे दी। वह बकरी बहुत शरारती थी और अपने मालिक के अलावा किसी की बात नहीं मानती थी। जैसे ही लड़के ने रस्सी पकड़ी, बकरी जोर-जोर से उछलने लगी। लड़का उसे पकड़ने की कोशिश करता, लेकिन वह बार-बार भाग जाती। काफी देर तक मेहनत करने के बाद भी वह बकरी को खूंटे से नहीं बांध पाया।

कुछ समय बाद शिष्य ने सोच-विचार। उसने समझा कि केवल ताकत लगाने से काम नहीं बनेगा। तब उसने चतुराई दिखाई। पहले उसने बकरी को शांत किया और उसके पैरों को रस्सी से बांध दिया। अब बकरी भाग नहीं सकती थी। इसके बाद उसने आराम से उसे खूंटे से बांध दिया।

यह देखकर गुरुजी बहुत खुश हुए। उन्होंने कहा, “तुमने अपनी बुद्धि का सही उपयोग किया है। जीवन में हर समस्या भी इसी बकरी की तरह होती है। यदि हम केवल ऊपर-ऊपर से समस्या को हल करने की कोशिश करेंगे, तो सफलता नहीं मिलेगी, लेकिन अगर हम समस्या की जड़ को पहचान लें, तो उसका समाधान आसान हो जाता है।”

गुरुजी की बात लड़के को समझ आ गई। उसने जाना कि सफलता केवल मेहनत से नहीं मिलती, बल्कि सही दिशा में सोचने और समझदारी से काम करने से मिलती है।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, मुश्किल समय में शांत दिमाग सबसे बड़ा हथियार होता है। इसलिए घबराएं नहीं, धैर्य से काम लें। किसी भी परेशानी का हल निकालने से पहले यह समझें कि असली कारण क्या है। कारण समझ में आने के बाद सही दिशा में किया गया काम जल्दी सफलता दिलाता है। मेहनत के साथ ही समझदारी से काम करें।

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Jeewan Aadhar Editor Desk