धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—911

पुराने समय में एक गांव में रहने वाला एक किसान बहुत परेशान था। मेहनत करने के बाद भी उसे सफलता नहीं मिल रही थी। कभी आर्थिक संकट, कभी पारिवारिक तनाव और कभी अधूरे काम, इन सबने उसे अंदर से तोड़ दिया था। वह सपने देखता, लक्ष्य बनाता, लेकिन हर बार किसी न किसी कारण उसका ध्यान भटक जाता और काम अधूरा रह जाता।

एक दिन वह गांव के बाहर रहने वाले एक ज्ञानी संत के पास पहुंचा। किसान ने विनम्रता से कहा, “गुरुदेव, मैं मेहनत तो बहुत करता हूं, लेकिन अपने लक्ष्य तक पहुंच नहीं पाता। कभी इधर-उधर के कामों में उलझ जाता हूं, तो कभी लालच और छोटी-छोटी बातों में समय बर्बाद हो जाता है। कृपया मुझे कोई मार्ग बताइए, जिससे मुझे सफलता मिल सके।”

संत मुस्कुराए और बोले, “मैं कल तुम्हारे घर आऊंगा, वहीं तुम्हें तुम्हारी समस्या का समाधान बता दूंगा।”

अगले दिन संत किसान के घर पहुंचे। किसान उस समय खेत पर गया हुआ था। उसकी पत्नी ने संत का आदर-सत्कार किया और बेटे को किसान को बुलाने भेजा। थोड़ी देर बाद किसान घर लौटा। उसके साथ उसका पालतू कुत्ता भी था, जो बहुत जोर-जोर से हांफ रहा था।

संत ने आश्चर्य से पूछा, “तुम्हारा खेत क्या बहुत दूर है?”

किसान बोला, “नहीं गुरुदेव, खेत तो पास ही है।”

संत ने फिर पूछा, “फिर तुम बिल्कुल शांत और सामान्य हो, जबकि तुम्हारा कुत्ता इतना थका हुआ क्यों है?”

किसान हंसते हुए बोला, “गुरुदेव, मैं तो सीधे रास्ते से चला आया, लेकिन यह कुत्ता रास्ते में आने वाले हर दूसरे कुत्ते पर भौंकता, उन्हें भगाने दौड़ता और इधर-उधर भटकता रहा। इसी वजह से यह बहुत थक गया है।”

संत मुस्कुराए और बोले, “यही तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है। तुम भी अपने लक्ष्य की ओर काम करते समय हर छोटी बात, लालच, दूसरों की बातों और व्यर्थ के कामों में उलझ जाते हो। जो व्यक्ति अपने रास्ते से भटकता है, उसकी ऊर्जा व्यर्थ खर्च हो जाती है और वह मंजिल तक नहीं पहुंच पाता।”

संत की बात किसान को समझ आ गई। उस दिन उसने समझ लिया कि सफलता केवल मेहनत से नहीं, बल्कि सही दिशा में लगातार आगे बढ़ने से मिलती है।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, जिस व्यक्ति को अपनी मंजिल साफ दिखाई देती है, वह रास्ते की रुकावटों से नहीं डरता। हर स्थिति अपना लक्ष्य के लिए स्पष्टता रखें। दूसरों की बातों, आलोचनाओं और बेकार के विवादों में समय बर्बाद करने से आपकी ऊर्जा खत्म होती है। हर बात में उलझना जरूरी नहीं है। हमें छोटी-छोटी चीजों में अपनी शक्ति खत्म नहीं करनी चाहिए। अपनी ऊर्जा केवल जरूरी कामों में लगाइए।

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