पुराने समय में एक व्यक्ति गरीबी से बहुत दुखी था। उसके पास न अच्छा घर था, न पर्याप्त भोजन और न ही जीवन में कोई स्थिरता। वह अक्सर सोचता कि अगर वह भी किसी धनवान सेठ जैसा बन जाए, तो उसका जीवन सुखी हो जाएगा। एक दिन वह बाजार में एक समृद्ध सेठ को देखता है। सेठ के वस्त्र, उसका सम्मान और उसकी जीवनशैली देखकर उसके मन में गहरी इच्छा पैदा होती है कि उसे भी ऐसा ही बनना है।
उस दिन से वह व्यक्ति केवल धन कमाने की कोशिश में लग जाता है। वह दिन-रात मेहनत करता है, छोटे-मोटे काम करता है, और धीरे-धीरे कुछ पैसा भी जमा कर लेता है, लेकिन जैसे-जैसे उसकी इच्छाएं बढ़ती जाती हैं, वैसे-वैसे उसे यह धन भी कम लगने लगता है। उसे फिर भी संतोष नहीं मिलता। उसका मन फिर से बेचैन और दुखी हो जाता है।
एक दिन उसकी मुलाकात एक विद्वान से होती है। विद्वान शांत स्वभाव का था और जीवन के गहरे अर्थ समझाता था। बातचीत के दौरान वह व्यक्ति अपनी पूरी कहानी बताता है। विद्वान उसे समझाता है कि केवल धन ही सुख का आधार नहीं है, बल्कि ज्ञान और समझ ही असली संपत्ति है। प्रभावित होकर वह व्यक्ति धन का विचार छोड़कर ज्ञान की ओर मुड़ जाता है।
वह रोज किताबें पढ़ने लगता है, नए विचार सीखता है और सोचता है कि अब वह ज्ञानी बन जाएगा तो जीवन सफल हो जाएगा। कुछ समय बाद फिर उसका मन भटकने लगता है। एक दिन उसे एक संगीतज्ञ दिखता है, उसे देखकर वह सोचने लगता है कि शायद संगीत सीखने से जीवन अधिक सुंदर बन सकता है।
वह संगीतज्ञ से मिलने के बाद संगीत सीखना शुरू कर देता है, लेकिन यहां भी कुछ समय बाद उसका उत्साह कम हो जाता है और वह फिर से असंतुष्ट हो जाता है।
अंत में उसकी मुलाकात एक संत से होती है। वह संत को अपनी पूरी कहानी सुनाता है। संत मुस्कुराते हुए कहते हैं कि समस्या धन, ज्ञान या संगीत नहीं है, बल्कि तुम्हारा बार-बार लक्ष्य बदलना है। अगर मन स्थिर नहीं होगा, तो कोई भी मार्ग सफलता तक नहीं ले जाएगा। जीवन में एक ही लक्ष्य चुनकर उस पर लगातार मेहनत करना ही सच्ची सफलता का सूत्र है।
धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, जब तक हमें यह स्पष्ट नहीं होगा कि हम क्या बनना चाहते हैं, तब तक हम किसी भी दिशा में सही प्रगति नहीं कर सकते। बार-बार लक्ष्य बदलना समय और ऊर्जा दोनों की बर्बादी करता है।








