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यमुना नदी फिर बनेगी सतयुगी

नई दिल्ली
भगवान कृष्ण की प्रिय यमुना को फिर से उसके पुराने विन मिलने वाले है। यमुना की सुंदरता के साथ—साथ पानी को भी मीठा किया जा रहा है। यमुना नदी के किनारों को साफ-सुंदर बनाने और उन्हें पुराने रूप में लौटाने के लिए डीडीए ने फाइनल प्लान तैयार कर लिया है। इसके तहत पहले लोहे के पुराने पुल से लेकर आईटीओ ब्रिज तक के हिस्से पर काम होगा। इसके बाद सेकंड फेज में यमुना के बचे हुए बाकी हिस्सों को लिया जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि यमुना के किनारों को सुंदर बनाने के काम का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कराने की योजना बनाई जा रही है। जैसे ही पीएमओ से इसके लिए डेट मिल जाएगी, किनारों को सुंदर बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। डीडीए के एक सीनियर अफसर ने बताया कि पहले फेज में यमुना पल्ला से ओखला तक के हिस्से में लोहे के पुल से आईटीओ ब्रिज तक के करीब 2.5 किलोमीटर एरिया को चुना गया है।

उन्होंने बताया कि इसमें एक बायोडायवर्सिटी पार्क भी बनाया जाएगा। लोगों के घूमने-फिरने के लिए करीब 2.5 किलोमीटर लंबा वॉक-वे भी बनाया जाएगा। इसमें लोगों को किसी हिल स्टेशन जैसा फील कराने के लिए जमीन को ऊंचा-नीचा भी किया जाएगा। इनके बीच में छोटी-छोटी झीलें भी बनाईं जाएंगी। अधिकारी ने बताया कि ज्यादातर काम लकड़ी से ही किया जाएगा। वॉक-वे भी लकड़ी का बनाया जाएगा। बीच-बीच में कुछ झौंपड़ियां भी बनाईं जाएंगी। वह भी लकड़ी की ही होंगी। लोगों के खाने-पीने के लिए अस्थायी इंतजाम भी किए जा सकते हैं। इसके लिए बांस का इस्तेमाल किया जाएगा। डीडीए का कहना है कि यमुना नदी के किनारों को सुंदर बनाने का मतलब यह नहीं है कि इसके प्राकृतिक रूप से छेड़छाड़ की जाएगी। सीमेंट और कंक्रीट का ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। किनारों के ब्यूटिफिकेशन का मतलब यह होगा कि किनारों को इनके पुराने रूप में लौटाया जाएगा।

जहां अभी गंदगी और कूड़ा-करकट पड़ा रहता है, उन जगहों को साफ करके एक सुंदर पार्क में तब्दील किया जाएगा। यहां आकर लोग सैर कर सकें और आराम से बैठकर यमुना नदी को निहार सकें। इसके लिए वुडन हट और वॉक-वे बनाए जाएंगे। अधिकारी का कहना है कि इसके अलावा यमुना के पानी को साफ करने का काम भी किया जा रहा है। हालांकि यह दोनों मामले अलग-अलग हैं। किनारों को सुंदर बनाने का काम जल्दी ही शुरू किया जा सकता है।

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