एक शिष्य ने अपने गुरु से कहा कि गुरुजी, मुझे जल्दी सफलता चाहिए। कोई ऐसा तरीका बताइए, जिससे हर समस्या तुरंत हल हो सके।
गुरु मुस्कुराए और बोले कि ठीक है, मैं तुम्हें एक तरीका बताता हूं, लेकिन पहले आश्रम की इस बकरी को खूंटे से बांध दो।
बकरी को पकड़ना आसान नहीं था, वह इधर-उधर उछलती रहती थी। शिष्य ने कई प्रयास किए, लेकिन बकरी काबू में नहीं आई। फिर उसने सोच-विचार किया और बकरी के पैर रस्सी से बांधकर धीरे-धीरे उसे खूंटे से बांध दिया। अब बकरी भी शांत हो गई थी।
गुरु ने शिष्य की बुद्धिमानी देख प्रसन्न होकर कहा कि ठीक इसी तरह, किसी भी समस्या की जड़ को पकड़ लेने से बड़ी से बड़ी समस्या भी सहजता से हल हो सकती है। यही सफलता का मूल मंत्र है।
धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, जीवन में आने वाली समस्याओं को नजरअंदाज करना या सतही समाधान खोजना सही नहीं है। ऐसा करने से सफलता लंबे समय तक टिक नहीं पाती है। विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और समझदारी से काम चाहिए। सबसे पहले समस्या की जड़ को पहचानें, उसके बाद हल निकालने की योजना बनाएं।
सफलता केवल भाग्य और कड़ी मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि यह विवेक और रणनीति का परिणाम है। बुरी परिस्थितियों में घबराने के बजाय सोच-समझकर कदम उठाने से ही सफलता मिलती है।








