हरियाणा हिसार

नागरिक नहीं, रैफर अस्पताल बोलिए जनाब!


हिसार

नागरिक अस्पताल में उपचार की उम्मीद लेकर आया अधिक शूगर का मरीज। उपचार तो नहीं हुआ, चिकित्सक ने कर दिया रेफर। सड़क हादसे में सिर पर चोट लगा मरीज उपचार के लिए आया। चिकित्सक ने कर दिया रेफर। सीने में दर्द होने के चलते हालत गंभीर होने पर अस्पताल के ईमरजैंसी वार्ड में उपचार के लिए आया। चिकित्सक ने कर दिया रेफर।
शहर के नागरिक अस्पताल के इमरजैंसी वार्ड में नागरिकों का उपचार कम रेफर की स्लिप ज्यादा मिलती है। यदि कोई गंभीर रोगी आ जाए तो उसके प्राथमिक उपचार तक के लिए भी इस वार्ड में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।
इमरजैंसी वार्ड, जहां गंभीर हालत से त्रस्त रोगियों के लिए अस्पताल के इस वार्ड में न तो सक्श मशीन है और न ही मरीज के हृदयगति की मूलभूत जांच के लिए प्रयोग में आने वाली ईसीजी मशीन ठीक हालत में है। इतना ही नहीं, हार्ट अटैक पर या अन्य गंभीर अवस्था में हृदय गति को दोबारा एक्टिव करने के लिए करंट पास करने वाली मशीन भी चालू हालत में नहीं है। यानि इमरजैंसी वार्ड इस वक्त केवल और केवल मरहम पट्टी करने तक ही सीमित रह गया है। गंभीर रोगी के यहां आने पर उसे एक स्लिप पकड़ा दी जाती है और वह है सिविल अस्पताल से अग्रोहा मैडिकल रेफर या फिर सिविल अस्पताल से पीजीआई रोहतक रेफर।
इमरजैंसी वार्ड में उपचार की उम्मीद के साथ आने वाले मरीजों के लिए इस गर्मी और ह्यूमस के चलते हालत और खराब हो जाती है। इसका मुख्य कारण यह है कि वार्ड में एयर कंडिशन की सुविधा नहीं होना। वार्ड में दो-दो एसी तो लगे हैं, मगर इन एसी का संचालन वार्ड में नहीं हो रहा है। अस्पतालकर्मियों की मानें तो वार्ड में लगे एसी तकनीकी रूप से खराब हैं और उन्हें ठीक करवाने के लिए काफी बार अस्पताल प्रशासन को लिखा जा चुका है, मगर कोई समाधान नहीं हो पाया है। समस्या जस की तस है। लोगों ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अब तो गर्मी आई है, जब गर्मी आ गई है तो एसी बंद होंगे और गर्मी जानेे के बाद इन एसी में तकनीकी खामियां आ जाती हैं।
चिकित्सकों के कैबिन में लगे एसी मिनटों में होते हैं ठीक
दिलचस्प बात है कि शहर के इस नागरिक अस्पताल में नागरिकोंं के लिए भले ही सुविधाएं न हों, मगर आम नागरिक को जांचने के वाले चिकित्सक के कैबिन में जो एसी लगे हैं, उनकी ठंडक भी बेहतरीन है और एसी खराब होने पर इस एसी को दुरुस्त करवाने के लिए मकैनिक भी तुरंत पहुंच जाते हैं। विपरीत इसके नागरिक अस्पताल के ही इमरजैंसी वार्ड में रोगियों के लिए लगे दो एसी पिछले काफी समय से खराब हैं और अस्पताल प्रशासन नागरिकों के लिए इन मूलभूत जरूरतों को पूरा करने में लगभग पूरी तरह से अक्षम बन रहा है।
सीएम के आने पर वर्षों पुरानी दीवार को नया लुक देने की कोशिश
नागरिक अस्पताल में जल्द ही डायलसिस की सुविधा आरंभ होने की उम्मीद है। इस डायलसिस सेंटर का शुभारंभ करने के लिए संभवत: सीएम मनोहर लाल आ सकते हैं। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग अस्पताल की वर्षों पुरानी बिल्डिंग को नये लुक में सजा रहा हैैे। अस्पताल की दीवारों पर जहां पहले सफेद रंग था, आज अस्पताल की उन्हीं दीवारों को भगवा जैसे रंग के साथ सजाया जा रहा है। अस्पताल करीबन 30 वर्ष पुरानी दीवारों को जवां बनाया जा रहा है। हालांकि पिछले करीबन आठ वर्षों में अस्पताल में हर तरह की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट तो आए, मगर हर प्रोजेक्ट के जरिए आरंभ होने वाली सुविधा का लाभ अभी तक नागरिक नहीं उठा पा रहा है।

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