धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से —336

पुराने समय में एक ढोंगी ज्योतिषी था। वह गांव के लोगों के सामने बड़ा ज्योतिषी बनने का ढोंग करता था। रोज रात में तारों को देखता और लोगों को भविष्य बताता था।

ज्योतिषी लोगों से कहता था कि मुझे तारों की भाषा पढ़नी आती है। तारे हमारा भविष्य बताते हैं, इसीलिए मैं उन्हें देखते रहता हूं। गांव के लोग भी उसकी बातों पर भरोसा कर लेते थे।

एक दिन रात के समय वह तारों को देखते हुए कहीं जा रहा था। उसका पूरा ध्यान तारों पर ही था। तभी अचानक वह गिर पड़ा। वहां कीचड़ था। कीचड़ में फिसलकर ज्योतिषी पास वाले एक गड्ढे में पहुंच गया। अब वह गड्ढे से निकलने की कोशिश करने लगा, लेकिन गड्ढा थोड़ा गहरा था। कीचड़ की वजह से वह व्यक्ति बाहर नहीं निकल पा रहा था।

बहुत कोशिशों के बाद भी जब वह कीचड़ से बाहर नहीं निकल सका तो उसने गांव के लोगों को आवाज लगाई। उसकी आवाज सुनकर गांव के लोग तुरंत ही उस गड्ढे के पास पहुंच गए और उसे रस्सी की मदद से बाहर निकाल लिया।

गांव के लोग ज्योतिषी की आदत जानते थे कि वह तारों को देखते हुए ही चल रहा होगा, तभी इस गड्ढे में गिरा है। लोगों ने कहा कि तुम हमें भविष्य के बारे में बताते हो, लेकिन तुम खुद अपना आज नहीं जानते हो। तुम्हें ये भी नहीं मालूम की तुम्हारे पैरों के नीचे क्या है। भविष्य में क्या होगा, ये सोचना छोड़ा वर्तमान पर ध्यान लगाओ। तभी जीवन सफल हो पाएगा।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, जो लोग भविष्य के लिए सोचते रहते हैं और वर्तमान में सही काम नहीं करते हैं, उन्हें कभी भी सुख नहीं मिल पाता है। इसीलिए वर्तमान में सही काम करेंगे तो भविष्य खुद ही सुधर जाएगा।

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सत्यार्थप्रकाश के अंश – 28

Jeewan Aadhar Editor Desk