धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—364

किसी राज्य में एक राजकुमारी थी, जिसके पास सुख-सुविधा की सभी चीजें थीं, दासियां हर पल उसकी सेवा में लगी रहती थीं। राजकुमारी अपने इस जीवन से बिल्कुल भी खुश नहीं थी, हमेशा दुखी रहती। वह समझ नहीं पा रही थी कि उसे क्या करना चाहिए ताकि वह खुश रह सके।

एक दिन राजकुमारी ने सोचा कि ऐसा जीवन किसी काम का नहीं है। वह मरने के लिए एक पहाड़ की ओर निकल पड़ी। रास्ते में उसने देखा कि एक बूढ़ा व्यक्ति कुत्तों को खाना खिला रहा है और उनकी देखभाल कर रहा है।

वह वृद्ध व्यक्ति बहुत खुश दिख रहा था, जैसे कि उसके जीवन में कोई परेशानी ही नहीं है। राजकुमारी ने वृद्ध को खुद के बारे में बताया और पूछा कि बाबा आप इतने खुश दिख रहे हैं, इसकी वजह क्या है?

वृद्ध ने बताया कि राजकुमारी जी कुछ दिन पहले मेरी पत्नी और बच्चे एक दुर्घटना में मर चुके हैं। मैं बहुत निराश था और अपने जीवन को खत्म करना चाहता था। एक दिन मैं अपना जीवन खत्म करने जा रहा था, तभी रास्ते में कुत्ते का छोटा सा बच्चा मेरे पीछे आ गया। मैं उससे बचने के लिए तेज दौड़ता हुआ अपने घर आ गया, पीछे-पीछे वह बच्चा भी आ गया। मैंने दरवाजा बंद कर दिया। कुछ देर बाद बाहर देखा तो वह कुत्ते का बच्चा ठंड की वजह के कांप रहा था, मुझे उस पर दया आ गई। मैंने उसे कंबल में लपेट दिया, पीने के दूध दिया। कुछ देर में वह बच्चा सामान्य हो गया। ये देखकर मुझे बहुत खुशी मिली।

उस दिन में मैं समझ गया कि अगर मैं दुखी हूं तो कम से कम दूसरों को खुशी तो दे ही सकता हूं। तब से मैंने इन बेजुबान कुत्तों की सेवा करना शुरू कर दी। अब मैं इस जीवन से बहुत खुश हूं।

राजकुमारी को भी ये अहसास हो गया कि उसे भी दूसरों के लिए भलाई के काम करना चाहिए, इससे ही उसे असली खुशी मिलेगी। ये सोचकर वह अपने महल आ गई और उस दिन से उसने गरीबों की सेवा करना शुरू कर दिया।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, अगर हम निराश हैं या जीवन से खुश नहीं हैं तो हमें ये जीवन दूसरों के सुख के लिए समर्पित कर देना चाहिए। ऐसा करने पर हमारी वजह से दूसरों के जीवन में खुशियां आ सकती हैं।

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Jeewan Aadhar Editor Desk