धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से— 736

एक बार एक युवक हर काम करने से पहले मुहूर्त देखता था। घर बदलना हो, दुकान खोलनी हो, किसी से बात करनी हो—सबके लिए वह पंडित जी के पास भागता। वह सोचता, “अगर मुहूर्त अच्छा हो तो काम सफल होगा, अगर बुरा हो तो सब बिगड़ जाएगा।”

एक दिन उसने नया व्यापार शुरू करने का निश्चय किया। वह पंडित जी के पास पहुँचा और बोला,“पंडित जी, मुझे दुकान खोलने का सबसे शुभ मुहूर्त बताइए।”

पंडित जी मुस्कुराए और बोले, “कल आ जाना, पंचांग देखकर बताऊँगा।”

अगले दिन युवक गया तो पंडित जी ने कहा, “आज मुहूर्त नहीं है, ग्रह ठीक नहीं हैं। पाँच दिन बाद आना।”

पाँच दिन बाद गया तो बोले, “आज चंद्रमा प्रतिकूल है, दस दिन बाद शुभ रहेगा।”

युवक दस दिन बाद पहुँचा, पंडित जी ने फिर कारण बता दिया— “आज राहु-केतु का दोष है, इस महीने कोई शुभ मुहूर्त नहीं।”

युवक निराश होकर बोला, “पंडित जी! फिर मैं काम कब शुरू करूँ? हर बार कोई न कोई कारण निकल आता है! क्या मेरे जीवन में शुभ मुहूर्त कभी आएगा ही नहीं?”

पंडित जी ने उसे पास बैठाया और गहरी आवाज़ में बोले— “बेटा, जीवन का सबसे बड़ा मुहूर्त पंचांग में नहीं, तेरे मन में लिखा होता है। जिस दिन तेरा मन प्रसन्न, निश्चय दृढ़, संकल्प स्पष्ट और सोच सकारात्मक हो— उसी दिन तेरे लिए सबसे श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त होता है।”

उन्होंने आगे कहा— “जब मन डरा हुआ हो, उदास हो, संदेहों से घिरा हो—तब लाख ग्रह ठीक हों, काम सफल नहीं होता। और जब मन आत्मविश्वासी हो, उत्साही हो— तब साधारण दिन भी भाग्यशाली बन जाता है।”

युवक की आँखों में चमक आ गई। उसने उसी क्षण दुकान खोलने का निश्चय किया।
वह बोला, “आज मेरा मन उत्साहित है, आशा से भरा है… तो आज ही मेरा शुभ मुहूर्त है!”

पंडित जी मुस्कुराए— “यही सही पहचाना। मन शुभ हो तो हर क्षण शुभ है।”

उस दिन युवक ने काम शुरू किया, और धीरे-धीरे उसका व्यापार खूब चल निकला।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, जो मन प्रसन्न, आशावादी, उत्साही और सकारात्मक हो— वही क्षण जीवन का सबसे श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त बन जाता है।

Shine wih us aloevera gel

Related posts

परमहंस स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—50

Jeewan Aadhar Editor Desk

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज—247

ओशो : इस उपचार में एक खतरा है

Jeewan Aadhar Editor Desk