एक बार एक युवक अधीर होकर पुज्य गुरुदेव राधिकादास जी के पास पहुँचा। चेहरे पर चिंता, दिल में घबराहट, और आँखों में हार का साया था।
उसने गुरुदेव जी से कहा, “गुरुदेव, मेरे जीवन में चारों तरफ अंधेरा है। रास्ता दिखता ही नहीं।
मैं क्या करूँ?”
गुरुदेव जी मुस्कुराए और उसे अपने साथ आश्रम के पीछे ले गए। रात गहरी थी — ऐसा अंधेरा कि हाथ को हाथ नहीं दिखाई देता था।
गुरुदेव जी ने एक छोटा-सा दीपक जलाया और बोले, “इस दीपक को लेकर रास्ते पर चलो।”
युवक बोला, “गुरुदेव, इस छोटी-सी लौ से पूरा रास्ता थोड़े ही दिखेगा!”
गुरुदेव जी ने शांत स्वर में कहा, “बेटा, किसी भी अंधेरे में पूरा रास्ता कभी नहीं दिखता… लेकिन यह छोटी-सी रोशनी इतना जरूर दिखाती है कि पहला कदम कहाँ रखना है। और जब तुम पहला कदम रखते हो, तो अगले कदम की जगह खुद-ब-खुद रोशन हो जाती है।”
युवक ने कुछ कदम चलकर देखा — सचमुच दीपक की छोटी लौ हर कदम के आगे थोड़ा-थोड़ा रास्ता दिखा रही थी।
गुरुदेव जी आगे बोले, “जीवन भी ऐसे ही है। जब अंधेरा हो, तो पूरा जीवन नहीं, बस अगला सही कदम खोजो। भगवान पूरा मार्ग नहीं दिखाते, लेकिन दिशा जरूर दिखाते हैं। अगर पहला कदम सही रखोगे, तो अगला पथ स्वयं उजालों में बदल जाएगा।”
युवक की आँखों में नई आशा जाग गई। उसने दीपक को सीने से लगाया और बोला— “गुरुदेव, अब समझ गया… अंधेरा रास्ता रोकता नहीं, सिर्फ हमें पहला कदम साहस से उठाना सिखाता है।”
गुरुदेव जी मुस्कुरा उठे— “बस यही जीवन का ज्ञान है—अंधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, एक छोटा-सा दीपक भी जीत सकता है…और दीपक आपका विश्वास, प्रयास और धैर्य है।”
धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, पूरा जीवन देखने की चिंता न करें — बस अगला सही कदम उठाएँ। बड़ी समस्याएँ छोटे-छोटे निर्णयों से हल होती हैं। विश्वास और धैर्य — अंधेरे को उजाले में बदल देते हैं।








