राशिफल

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से —789

बहुत समय पहले की बात है। एक शांत आश्रम में एक ज्ञानी संत रहते थे। उनका जीवन सादगी, संतोष और करुणा से भरा था। दूर-दूर से लोग उनके पास आते, कोई दुख लेकर, कोई शिकायत लेकर और कोई अपने भाग्य को कोसते हुए।

एक दिन एक पढ़ा-लिखा युवक संत के पास आया। उसके चेहरे पर थकान और मन में गहरा असंतोष था। उसने कहा— “महाराज, मैं मेहनत करता हूँ, फिर भी जीवन में आगे नहीं बढ़ पा रहा। मेरे पास न वैसा धन है, न वैसा मान-सम्मान, जैसा दूसरों के पास है। मुझे लगता है, ईश्वर ने मुझे कम ही दिया है।”

संत ने युवक को ध्यान से देखा और मुस्कराकर बोले— “बेटा, क्या तुम सच में जानते हो कि तुम्हारे पास क्या-क्या है?”

युवक बोला—“जो दिखाई देता है वही तो है—एक साधारण नौकरी, छोटा सा घर और ढेर सारी परेशानियाँ।”

संत धीरे-धीरे उठे, आश्रम के आँगन से एक साधारण सा पत्थर उठाया और युवक के हाथ में देते हुए बोले— “इसे बाजार में ले जाओ। जो भी इसकी कीमत पूछे, सुन लेना, पर इसे बेचना मत।”

युवक पत्थर लेकर बाजार गया। सब्ज़ी वाले ने कहा—“5 रुपए दूँगा।”
एक कबाड़ी बोला—“10 रुपए दे सकता हूँ।”
किसी ने हँसकर कहा—“पत्थर का क्या मूल्य!”

युवक वापस आया और सारी बात संत को बताई। संत बोले—“अब इसी पत्थर को शहर के जौहरी के पास ले जाओ।”

जब जौहरी ने पत्थर को देखा तो उसकी आँखें चमक उठीं। उसने कहा— “यह तो बहुमूल्य रत्न है। मैं इसके लाखों रुपए देने को तैयार हूँ।”

युवक स्तब्ध रह गया। वही पत्थर, वही आकार—पर मूल्य कितना बदल गया!

संत ने शांत स्वर में कहा— “बेटा, यही जीवन का सत्य है। हर व्यक्ति के पास कुछ न कुछ अमूल्य होता है—किसी के पास स्वास्थ्य, किसी के पास परिवार, किसी के पास मेहनत करने की शक्ति, किसी के पास समय और किसी के पास ईमानदारी। लेकिन जब तक हम खुद उनकी कीमत नहीं समझते, तब तक दुनिया भी उन्हें साधारण ही समझती है।”

युवक ने सिर झुका लिया। संत आगे बोले— “तुम्हें ईश्वर से शिकायत नहीं है, तुम्हें अपनी दृष्टि से समस्या है। तुम जो नहीं है, उसी को देखते रहे। जो है, उसका कभी सम्मान नहीं किया।”

संत ने अंतिम बात कही— “स्वीकार करना ही पहला कदम है। सम्मान करना दूसरा। और कृतज्ञ होना तीसरा। जो व्यक्ति अपने पास की चीजों का आदर करता है, वही आगे चलकर अधिक पाने का अधिकारी बनता है।”

युवक के मन का बोझ हल्का हो गया। वह पहली बार अपने जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने लगा।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, दूसरों से तुलना छोड़िए। जो आपके पास है, उसे स्वीकारिए। उसका सम्मान कीजिए। क्योंकि संतोष में ही शांति है और शांति में ही सच्ची समृद्धि छिपी है।

Shine wih us aloevera gel

Related posts

2 सितम्बर 2021 : जानें गुरुवार का राशिफल

Jeewan Aadhar Editor Desk

6 दिसम्बर 2020: जानें रविवार का राशिफल

23 March 2024 Ka Rashifal : सौभाग्‍य योग में मेष और सिंह राशि वालों पर मेहरबान होंगे शनिदेव, आपके धन में होगी वृद्धि, जानें 12 राशियों का राशिफल