धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—841

एक छोटे से गांव में एक अंधा व्यक्ति रहता था। वह अकेला था और उसका जीवन गांव के लोगों की मदद पर निर्भर था। यह व्यक्ति शांत स्वभाव का था और कभी किसी के काम में बिना वजह दखल नहीं देता था।

अंधे व्यक्ति की एक आदत थी, रात में जब भी वह घर से बाहर निकलता, हमेशा अपने साथ एक जलती हुई लालटेन लेकर चलता। गांव के लोग इसे अजीब मानते थे, लेकिन उन्होंने कभी उसे कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

एक दिन गांव के कुछ शरारती लड़कों ने उसे लालटेन के साथ देखा। उन्होंने हंसी उड़ाते हुए कहा, “तुम अंधे हो, तुम्हें तो कुछ दिखाई नहीं देता। फिर ये लालटेन किस काम की?”

अंधे व्यक्ति ने शांतिपूर्वक उत्तर दिया, “तुम सही कह रहे हो, मेरे लिए लालटेन का कोई लाभ नहीं है। मेरे लिए दिन और रात में कोई फर्क नहीं है, मैं अंधकार में ही जीता हूं, लेकिन यह लालटेन मैं दूसरों के लिए रखता हूं, ताकि वे मुझे देख सकें और कोई दुर्घटना न हो।”

लड़कों को यह सुनकर शर्मिंदगी हुई। उन्होंने महसूस किया कि उन्होंने सिर्फ अपनी अधूरी जानकारी और समझ के आधार पर किसी को गलत समझ लिया। सही व्यक्ति के बारे में गलत राय बनाकर उन्होंने उसका मजाक उड़ाया।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले व्यक्ति और परिस्थिति की पूरी जानकारी हासिल करें। अधूरी जानकारी पर आधारित राय अक्सर गलत साबित होती है। इसलिए पूरी जानकारी हासिल करने के बाद ही आगे बढ़ें।

Shine wih us aloevera gel

Related posts

श्याम बाबा : हरियाणा में अलग—अलग जगह धड़ और शीश विराजमान, कैसे बनें खाटू नरेश

Jeewan Aadhar Editor Desk

परमहंस स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—64

Jeewan Aadhar Editor Desk

स्वामी सदानंद के प्रवचनो से—174

Jeewan Aadhar Editor Desk