धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—828

एक गाँव में एक संत रहते थे। उनके पास एक युवक आया और बोला — “गुरुदेव, मैं तुरंत अमीर बनना चाहता हूँ, जल्दी प्रसिद्धि चाहता हूँ, मुझे अभी सुख चाहिए।”

संत मुस्कुराए और उसे एक पीपल का छोटा सा पौधा दिखाया। बोले — “इसे आज लगाओ, रोज़ पानी दो, और धैर्य रखो।”

युवक बोला — “मुझे तो आज ही फल चाहिए, पेड़ बनने में सालों लगेंगे!”

संत ने समझाया — “जो चीज़ समय लेकर बनती है, वही स्थायी सुख देती है। जो जल्दी मिलता है, वह जल्दी छिन भी जाता है। अधीरता मन को अशांत करती है, और अशांत मन सही निर्णय नहीं ले पाता।”

कुछ वर्षों बाद वही पीपल विशाल वृक्ष बना, गाँव को छाया देने लगा। तब युवक समझ गया —
सफलता का फल समय, श्रम और धैर्य से ही मीठा होता है।

संत ने कहा— रावण ने अपनी शक्ति और तप से बहुत कुछ प्राप्त किया, परंतु वह और अधिक सत्ता और सुख तुरंत चाहता था। उसकी यही अधीर महत्वाकांक्षा उसे भ्रमित कर गई। फलस्वरूप उसका समूचा वंश नष्ट हो गया।

इसी प्रकार दुर्योधन को राज्य मिला हुआ था, पर वह पांडवों का हिस्सा भी तुरंत चाहता था।
उसकी लालसा और अधीरता ने उसे अशांत कर दिया। अंततः महाभारत जैसा विनाशकारी युद्ध हुआ।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, आज कई लोग जल्दी अमीर बनने के लिए गलत निवेश, जुए या धोखाधड़ी के रास्ते चुन लेते हैं। शुरुआत में थोड़ी सफलता मिलती है, पर भीतर भय, तनाव और असुरक्षा बनी रहती है। धीरे-धीरे मानसिक शांति खो जाती है। जो सुख शांति छीन ले, वह वास्तव में सुख नहीं है। तुरंत सफलता की इच्छा मन में लालच और तुलना पैदा करती है। लालच से भ्रम पैदा होता है। भ्रम से अशांति जन्म लेती है।

सच्चा सुख धैर्य, परिश्रम और संतोष में है। जैसे बीज को वृक्ष बनने में समय लगता है, वैसे ही जीवन की उपलब्धियाँ भी समय मांगती हैं।

Shine wih us aloevera gel

Related posts

स्वामी राजदास : ईश्वर है या नहीं???

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—607

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—272