धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से— 867

रामकृष्ण परमहंस के आश्रम में एक शिष्य था- मणि। मणि एक गृहस्थ व्यक्ति थे, इनके जीवन में परिवार, जिम्मेदारियां और रोजमर्रा की कई परेशानियां थीं। वे अपने परिवार से प्रेम तो करते थे, लेकिन धीरे-धीरे जिम्मेदारियों का बोझ उन्हें भारी लगने लगा था। उनके मन में एक ही इच्छा उठती थी कि सब कुछ छोड़कर भगवान की भक्ति में लीन हो जाना चाहिए।

एक दिन वे अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के पास पहुंचे। उनके चेहरे पर थकान और मन में द्वंद्व साफ दिखाई दे रहा था। उन्होंने विनम्रता से कहा, “गुरुदेव, मैं तन-मन से भगवान की भक्ति करना चाहता हूं, लेकिन ये पारिवारिक जिम्मेदारियां मुझे रोकती हैं। मैं इनसे मुक्त होना चाहता हूं।”

परमहंस मुस्कुराए। उन्होंने शांत स्वर में कहा, “मणि, तुम जो अभी कर रहे हो, वही भी भगवान की सेवा ही है। तुम अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हो, उनके लिए मेहनत कर रहे हो, यह भी एक प्रकार की पूजा है।”

मणि ने कुछ असंतोष के साथ कहा, “लेकिन गुरुदेव, मेरी इच्छा है कि कोई और मेरे परिवार की जिम्मेदारी संभाल ले, ताकि मैं पूरी तरह ईश्वर की भक्ति कर सकूं।”

परमहंस ने गंभीरता से उत्तर दिया, “तुम्हारी भावना अच्छी है, लेकिन मार्ग अधूरा है। सच्ची भक्ति केवल जंगलों में या आश्रमों में नहीं होती। वह हर उस कर्म में होती है जो निस्वार्थ भाव से किया जाए। तुम पहले अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाओ। साथ ही, भक्ति भी करते रहो। जब तुम्हारे कर्तव्य पूरे होंगे, तब तुम्हारा मन स्वतः ही भक्ति में और गहराई से डूब जाएगा।”

मणि को यह बात समझ में आने लगी। उन्हें एहसास हुआ कि वे जिम्मेदारियों से भागना चाहते थे, जबकि सच्चा मार्ग उन्हें अपनाने का था। उस दिन के बाद उन्होंने अपने परिवार की सेवा को ही पूजा मान लिया और धीरे-धीरे उनका मन भी शांत और संतुलित होने लगा।

इस प्रकार, मणि ने सीखा कि जीवन में संतुलन ही सच्ची साधना है- जहां कर्तव्य और भक्ति दोनों साथ चलते हैं।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, अक्सर हम सोचते हैं कि समस्याओं से दूर जाकर शांति मिल जाएगी, लेकिन असली शांति जिम्मेदारियों को निभाने में है। परिवार, काम और रिश्ते- ये जीवन का हिस्सा हैं, बोझ नहीं। जो लोग ये बात समझ लेते हैं, उन्हें शांति जरूर मिलती है।

Shine wih us aloevera gel

Related posts

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—764

Jeewan Aadhar Editor Desk

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—167

स्वामी राजदास : कर्म और फल

Jeewan Aadhar Editor Desk