पुराने समय की बात है, एक व्यक्ति अपनी गरीबी से बहुत दुखी था। उसे लगा कि जीवन में अब कुछ नहीं बचा, इसलिए उसने नदी में कूदकर अपनी जान देने की कोशिश की। उसी समय वहां से एक संत गुजर रहे थे। उन्होंने तुरंत नदी में छलांग लगाई और उस व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
जब व्यक्ति को होश आया, तो संत ने उससे पूछा, “तुमने ऐसा कदम क्यों उठाया?”
व्यक्ति ने रोते हुए अपनी गरीबी और दुखों की कहानी सुनाई। संत को उस पर दया आ गई। उन्होंने कहा, “मेरे पास एक चमत्कारी घड़ा है। तुम इससे जो मांगोगे, वह तुम्हें मिल जाएगा। मैं यह घड़ा तुम्हें दे सकता हूं, लेकिन मेरी एक शर्त है।”
संत ने कहा कि तुम्हारे पास दो विकल्प हैं। पहला विकल्प- दो साल की सेवा: अगर तुम दो साल मेरी सेवा करोगे, तो मैं तुम्हें यह घड़ा दे दूंगा।
दूसरा विकल्प- पांच साल की सेवा: अगर तुम पांच साल सेवा करोगे, तो मैं तुम्हें यह घड़ा बनाने की विधि भी सिखा दूंगा।
संत ने एक चेतावनी भी दी- “अगर यह घड़ा कभी टूट गया, तो इससे मिली सारी सुख-सुविधाएं तुरंत गायब हो जाएंगी।”
उस व्यक्ति को बहुत जल्दी अमीर बनना था, इसलिए उसने दो साल वाला विकल्प चुना। उसने दो सालों तक मन लगाकर सेवा की और समय पूरा होने पर महात्मा से घड़ा लेकर अपने घर आ गया। घड़े के चमत्कार से उसने बड़ा महल, कीमती कपड़े और बहुत सारा धन प्राप्त कर लिया।
अचानक मिली अमीरी ने उसे अहंकारी और लापरवाह बना दिया। उसे बुरी लतें लग गईं और वह नशा करने लगा। एक दिन नशे की हालत में वह घड़े को सिर पर रखकर नाच रहा था, तभी अचानक घड़ा हाथ से छूटकर गिर गया और टूट गया। घड़ा टूटते ही उसका महल, धन और सब कुछ गायब हो गया। वह फिर से पहले जैसा गरीब हो गया। अब उसे पछतावा हो रहा था कि काश उसने धैर्य रखा होता और पांच साल सेवा करके घड़ा बनाने की कला सीख ली होती, तो आज उसे दर-दर न भटकना पड़ता।
धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, जीवन में जल्दबाजी में किए गए काम हमेशा जोखिम भरे होते हैं। हमेशा टिकाऊ सफलता की राह चुननी चाहिए। धन या संसाधन कभी भी नष्ट हो सकते हैं, लेकिन जो कला या हुनर आप सीख लेते हैं, वह जीवन भर आपके साथ रहता है।








