एक राज्य का राजा था, तो बहुत शक्तिशाली, लेकिन उसकी सोच अक्सर संदेह और अंधविश्वास से भरी रहती थी। वह हर घटना को शुभ-अशुभ के नजरिए से देखता था। उसके राज्य के एक गांव में चर्चा चल रही थी कि वहां के एक व्यक्ति का चेहरा अशुभ है और उसे देखते ही दुर्भाग्य आता है। लोगों की सोच इतनी मजबूत हो गई है कि उन्होंने उस व्यक्ति को दोषी मान लिया है।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि गांव के लोग उसे गांव से निकालने की कोशिश करने लगे। उसे अपमानित किया जाने लगा और उसके साथ गलत व्यवहार होने लगा। जब यह बात राजा तक पहुंची, तो उन्होंने सोचा कि बिना जांच के किसी को दोषी मानना उचित नहीं है। इसलिए राजा ने उस व्यक्ति को अपने महल में रहने का आदेश दिया, ताकि वह खुद इस बात की सच्चाई जान सके।
अगले दिन सुबह, राजा ने सबसे पहले उसी व्यक्ति का चेहरा देखा। उसी दिन राजा के साथ एक घटना हुई, उसे पूरे दिन राजकीय कार्यों में अत्यधिक व्यस्त रहना पड़ा और व्यस्तता के कारण वह भोजन नहीं कर सका। शाम तक उसे लगने लगा कि सच में उस व्यक्ति के कारण उसका दिन खराब हुआ है। अब राजा भी राज्य के लोगों की बातों पर विश्वास करने लगा और उसने उस व्यक्ति को अशुभ मान लिया।
गुस्से और अंधविश्वास में आकर राजा ने उस व्यक्ति को मृत्यु दंड दे दिया। जैसे ही यह निर्णय लिया गया, राजा के विद्वान मंत्री ने उसे रोकते हुए पूछा कि एक निर्दोष व्यक्ति को किस आधार पर दंड दिया जा रहा है।
राजा ने कहा कि आज सुबह मैंने उसका चेहरा देखा और मेरा पूरा दिन खराब हो गया, इसलिए वह अशुभ है। मंत्री ने शांत स्वर में कहा, “राजन्, क्षमा करें, लेकिन एक बात और भी है, उस व्यक्ति ने भी आज सुबह सबसे पहले आपका चेहरा देखा था। आपको तो सिर्फ भोजन नहीं मिला, लेकिन इस व्यक्ति पर तो मृत्यु का संकट खड़ा हो गया है।”
यह सुनकर राजा चुप हो गया। मंत्री ने आगे समझाया कि किसी भी व्यक्ति का चेहरा न तो शुभ होता है और न अशुभ। असल में अशुभ हमारी सोच होती है।
राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने तुरंत उस व्यक्ति को मुक्त कर दिया और समझ गया कि जीवन में निर्णय तथ्यों पर आधारित होने चाहिए, न कि अंधविश्वास और नकारात्मक सोच पर।
धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, हमें हमारी सोच समझनी चाहिए। हमारी सोच ही हमारे अनुभव को आकार देती है। अगर हम किसी चीज को नकारात्मक मान लेते हैं, तो वही हमें हर जगह नकारात्मक दिखने लगती है। इसलिए किसी भी व्यक्ति या स्थिति के बारे में अंतिम निर्णय लेने से पहले उसे निष्पक्ष रूप से समझना चाहिए।








