धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—903

एक बार एक गांव में अर्जुन नाम का युवक रहता था। वह मेहनती था, लेकिन जीवन में लगातार परेशानियां आ रही थीं। कभी व्यापार में घाटा, कभी स्वास्थ्य की चिंता, तो कभी अपने ही लोगों की नाराजगी। धीरे—धीरे अर्जुन टूटने लगा। उसे लगने लगा कि अब उसके जीवन में कुछ अच्छा नहीं बचा।

एक दिन वह गांव के बाहर रहने वाले एक संत के पास पहुंचा और बोला, “गुरुदेव, जब जीवन में हर तरफ दुख और परेशानी हो, तब इंसान क्या करे?”

संत मुस्कुराए और उसे अपने साथ नदी किनारे ले गए। वहां एक बड़ा पत्थर पड़ा था। संत ने कहा, “इस पत्थर को उठाकर पानी में फेंको।”

अर्जुन ने पूरी ताकत लगाकर पत्थर उठाया और नदी में फेंक दिया। पत्थर कुछ पल लहरों से टकराया और फिर धीरे—धीरे पानी में समा गया।

संत बोले, “मुश्किलें भी इसी पत्थर की तरह होती हैं। यदि इंसान अकेला उन्हें उठाने की कोशिश करे, तो वह जल्दी थक जाता है। लेकिन धैर्य, परिवार और सच्चे मित्र साथ हों, तो वही बोझ हल्का लगने लगता है।”

अर्जुन ध्यान से सुनता रहा।

संत ने कहा, “मान लो एक किसान ने खेत में बीज बोया। अगर वह अगले ही दिन खेत खोदकर देखने लगे कि बीज अंकुरित हुआ या नहीं, तो फसल कभी नहीं उगेगी। किसान धैर्य रखता है, समय देता है, तभी खेत हरा—भरा होता है। ठीक वैसे ही जीवन की परेशानियां भी समय मांगती हैं। धैर्य रखने वाला व्यक्ति एक दिन अवश्य सफल होता है।”

संत ने पास खड़े पेड़ की ओर इशारा करते हुए कहा, “आंधी आने पर अकेली सूखी टहनी जल्दी टूट जाती है, लेकिन कई टहनियां एक साथ बंधी हों तो तेज तूफान भी उन्हें आसानी से नहीं तोड़ पाता। इसी तरह मुश्किल समय में परिवार और सच्चे मित्र इंसान की ताकत बन जाते हैं। उनका साथ व्यक्ति को टूटने नहीं देता।”

फिर संत ने अर्जुन से पूछा, “जब तुम दुखी होते हो, क्या तुम्हारी मां तुम्हारी चिंता नहीं करती? क्या तुम्हारे मित्र तुम्हें संभालने की कोशिश नहीं करते?”

अर्जुन की आंखें नम हो गईं। उसे एहसास हुआ कि वह अपनी परेशानियों में इतना उलझ गया था कि अपने साथ खड़े लोगों का महत्व ही भूल गया।

संत ने अंत में कहा, “जीवन में कठिन समय हमेशा स्थायी नहीं होता। लेकिन उस समय धैर्य खो देना सबसे बड़ी हार है। याद रखो— धैर्य इंसान को संभालता है, मित्र उसे हिम्मत देते हैं,और परिवार उसे टूटने से बचाता है।”

उस दिन के बाद अर्जुन ने शिकायत करना छोड़ दिया। उसने धैर्य रखना सीखा, अपने परिवार के साथ समय बिताना शुरू किया और मित्रों का सम्मान करना सीखा। धीरे—धीरे उसका जीवन फिर से खुशियों से भरने लगा।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, मुश्किल समय में घबराने की बजाय धैर्य रखना चाहिए, क्योंकि सच्चे मित्र और परिवार का साथ हर अंधेरे दौर को आसान बना देता है।

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