पुराने समय में एक गांव में एक किसान का खेत गांव के बाहर था, जहां वह रोज सुबह से शाम तक खेती-किसानी का काम करता था। किसान के खेत में एक समस्या लंबे समय से बनी हुई थी, खेत में एक बड़ा सा दिखने वाला पत्थर था, जो खेत में धंसा हुआ था।
शुरुआत में किसान ने उसे हल्के में लिया। उसे लगा कि यह कोई मामूली रुकावट है, धीरे-धीरे वह इसे नजरअंदाज करने लगा, लेकिन समय के साथ वह पत्थर उसके लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया। जब भी वह खेत में हल चलाता, उसका हल उस पत्थर से टकराकर टूट जाता। कई बार उसके पैर भी चोटिल हो चुके थे। उसके औजार भी खराब हो रहे थे और काम भी पूरा नहीं हो पा रहा है।
फिर भी किसान सोचता रहा कि यह तो बहुत बड़ा पत्थर है, इसे हटाना मेरे बस की बात नहीं। इस सोच ने उसे निष्क्रिय बना दिया। वह हर बार नुकसान सहता रहा, लेकिन समस्या को हल करने की कोशिश नहीं की।
काफी समय बीत गया। एक दिन फिर वही हुआ। खेती करते समय उसका हल जोर से पत्थर से टकराया और टूट गया। इस बार किसान का धैर्य टूट गया। वह बहुत गुस्से में आ गया और उसने ठान लिया कि अब चाहे जो हो जाए, इस पत्थर को हटाना ही होगा।
उसने गांव के लोगों को मदद के लिए बुलाया। कुछ लोग आए और सबने मिलकर उस जगह को खोदना शुरू किया। सभी को लग रहा था कि यह बहुत बड़ा पत्थर होगा, जिसे निकालना आसान नहीं होगा, लेकिन जैसे-जैसे खुदाई आगे बढ़ी, सभी हैरान रह गए। वह पत्थर उतना बड़ा नहीं था जितना उन्होंने सोचा था। थोड़ी ही मेहनत में वह पूरी तरह बाहर निकल आया। किसान खुद भी आश्चर्यचकित था। उसे खुशी भी हुई कि समस्या खत्म हो गई और दुख भी कि उसने इतने साल इसे अपनी सोच में ही बहुत बड़ा बना रखा था।
उस दिन उसे समझ आया कि कई बार समस्याएं उतनी बड़ी नहीं होतीं जितनी हम उन्हें अपने डर और सोच से बना देते हैं।
धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, किसी भी समस्या को अनदेखा नहीं करना चाहिए। किसान की तरह हम भी कई बार छोटी समस्याओं को नजरअंदाज करते रहते हैं, जो आगे चलकर बड़ी बाधा बन जाती हैं। समय रहते समाधान ढूंढना हमेशा बेहतर होता है।








