हिसार

बेटे ने पूरी की पिता की इच्छा, हेलीकॉप्टर से घर लाया दुल्हनिया

हरियाणा के कवि पं. दुनीचंद शर्मा का पोता है दुल्हा

आदमपुर (अग्रवाल)
शादी लोगों के जीवन का सबसे अहम लम्हा माना जाता है। शादी को यादगार बनाने के लिए हर व्यक्ति तरह-तरह के इंतजाम करता है। कोई दुल्हन को लाने के लिए महंगी से महंगी लग्जरी गाड़ी का उपयोग करते हैं, जिससे उनकी शादी जीवन संगिनी और लोगों को जीवन भर याद रहे। ऐसी ही एक बारात आदमपुर के गांव बगला में शुक्रवार को देखने को मिली। जहां दूल्हा अपनी जीवन संगिनी के साथ सात फेरे लेने के बाद हेलीकॉप्टर से अपने संग लेकर आया। गांव बगला निवासी सेवानिवृत कानूनगो ओमप्रकाश शर्मा के बेटे श्यामसुंदर शर्मा का रिश्ता भिवानी के गांव रिवासा निवासी सत्यनारायण की बेटी मीनू के साथ इस साल 15 जनवरी को तय हुआ था। पिता ओमप्रकाश शर्मा की इच्छा थी कि बेटा हेलीकॉप्टर में दुल्हनिया को घर लेकर आए। पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए चार बहनों के भाई ने गुडग़ांव की एक कंपनी से हेलीकॉप्टर बुक करवाया। गांव बगला से उड़ान भरने के लिए बकायदा प्रशासन से अनुमति भी ली गई और कोरोना काल को देखते हुए सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए।

लैंडिग के लिए गांव बगला में पंचायत की जमीन पर हेली पैड बनाया गया। बगला निवासी दूल्हा श्यामसुंदर अपनी दुल्हन मीनू को लेकर पहुंचा तो पहले हेलीकॉप्टर ने गांव में आसमान पर चक्कर लगाए। दोनों गांव की दूरी 85 किलोमीटर के करीब है। इतनी दूरी तय करने के लिए करीब आधे घंटे में हेलीकॉप्टर दुल्हन को लेकर गांव बगला में पहुंचा। हेलीकॉप्टर में दूल्हा-दुल्हन की जोड़ी देखने के लिए गांववाले भी आतुर थे। दोनों को देखने के लिए भारी भीड़ भी जुट गई क्योंकि, गांव में यह इस प्रकार की ऐसी पहली शादी थी। इस मौके पर ओमप्रकाश कानूनगो, अर्जुन, सुनीता, वरुण दत्त, उषा, तरुण, सीमा, संदीप शर्मा, ज्योति, सीमा, गोविंद शेरपुरा, महावीर, ईश्वर, रवि, विजय शर्मा, सीताराम आदि मौजूद रहे।

दादा ने कविताओं के माध्यम से बनाई थी पहचान
दुल्हे श्यामसुंदर शर्मा के दादा गांव बगला निवासी स्व. पं.दुनीचंद शर्मा भी अपनी कविताओं व अभिनय के कारण इलाके के अलावा पूरे प्रदेश में अपनी पहचान बना चुके है। अपने जमाने में पं. दुनीचंद शर्मा ने स्वयं रचित कविताओं के साथ रामलीला मंचन व अन्य हरियाणवीं मंचों पर अपने अभिनय का लोहा मनवाया था। इतना ही नही पं. दुनीचंद राजनीति मंचों पर भी अपनी विशेष छाप छोड़ चुके है। पूर्व उपप्रधानमंत्री स्व. ताऊ देवीलाल और पूर्व मुख्यमंत्री स्व.भजनलाल की रैलियों में मंच पर ही गीत बनाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके है। इस कला के चलते वे कई बार मुख्यमंत्रियों के हाथों सम्मानित भी हो चुके है।

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