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जन्म व मृत्यु के भय का नाश करती है श्रीमद्भागवत कथा : सुरेश चंद्र शास्त्री

‘श्रीमद्भागवत कथा शाश्वत श्री भगवान का स्वरूप’

भव्य कलश यात्रा के साथ सैक्टर 9-11 में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ –

जय श्री बालाजी जय मां जगदंबे मंडल ट्रस्ट की ओर से करवया जा रहा है कथा का आयोजन

हिसार,
सैक्टर 9-11 में जय श्री बालाजी जय मां जगदंबे मंडल ट्रस्ट रजिस्टर्ड द्वारा प्रथम संगीतमय श्रीमद्भागवत का शुभारंभ रविवार को भव्य कलश शोभा यात्रा के साथ किया गया। कलश शोभा यात्रा प्रात: 8 बजे भागवत कथा स्थल से प्रारंभ होकर सैक्टर 9-11 से होते हुए वापिस कथा स्थल पर पहुंची। कलश यात्रा में काफी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं तथा शोभायात्रा के दौरान मनमोहक झांकी निकाली गई। कथा का आयोजन सैक्टर 9-11 स्थित जय श्री बालाजी जय मां जगदंबे मंदिर परिसर में किया जा रहा है। मंडल प्रधान प्रवीन जैन ने बताया कि कथा समय दोपहर 3 से सायं 6 बजे तक है।
कथा के प्रथम दिन व्यास पीठ पर विराजमान श्रीमद्भागवत कथा के सरस प्रवक्ता श्रीधाम वृंदावन से पधारे श्रद्धेय पं. सुरेशचन्द्र शास्त्री ने अपनी मधुर वाणी से श्रीमद्भागवत कथा का महातम्य बताया कि श्रीमद्भागवत ग्रन्थ श्रीशुकदेव के श्रीमुख से उद्गीत हुआ। यह ग्रन्थ जन्म व मृत्यु के भय का नाश कर देता है, भक्ति के प्रवाह को बढ़ाता है तथा भगवान श्रीकृष्ण की प्रसन्नता का प्रधान साधन है। मन की शुद्धि के लिए श्रीमद् भगवत से बढक़र कोई साधन नहीं है। यह श्रीमद् भागवत कथा देवताओं को भी दुर्लभ है तभी परीक्षित जी की सभा में शुकदेव ने कथामृत के बदले में अमृत कलश नहीं लिया। ब्रह्मा जी ने सत्यलोक में तराजू बाँध कर जब सब साधनों, व्रत, यज्ञ, ध्यान, तप, मूर्ति पूजा आदि को तोला तो सभी साधन तोल में हल्के पड़ गए और अपने महत्व के कारण भागवत ही सबसे भारी रहा। अपनी लीला समाप्त करके जब श्री भगवान निज धाम को जाने के लिए उद्यत हुए तो सभी भक्तगणों ने प्रार्थना कि हम आपके बिना कैसे रहेंगे तब श्री भगवान ने कहा कि वे श्रीमद् भगवत में समाए हैं। यह ग्रन्थ शाश्वत उन्हीं का स्वरुप है। इसीलिए स्वयं के कल्याण के लिए तथा अपने जीवन को धन्य बनाने केलिए हमें श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए और इस अवसर को कभी भी चूकना नहीं चाहिए। पठन-पाठन व श्रवण से तत्काल मोक्ष देने वाले इस महाग्रंथ को सप्ताह-विधि से श्रवण करने पर यह निश्चय ही भक्ति प्रदान करता है। आज श्रद्धालुओं को कथा के प्रथम स्कंध का श्रवण करवाया गया। कलश शोभा यात्रा व कथा के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कल की कथा में महाभारत चरित्र, वराह अवतार एवं कपिलोख्यान का उल्लेख रहेगा।

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