हिसार,
हरियाणा सरकार द्वारा राज्य परिवहन विभाग में किलोमीटर स्कीम के तहत 700 प्राइवेट बसें हायर करने और बिना किसी पॉलिसी के लाभ वाले मार्गों पर आए दिन नए-नए निजी परमिट जारी करने के खिलाफ व कर्मचारियों की मानी गई मांगों को लागू करने की मांग को लेकर रोडवेज ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर 5 सितंबर को प्रदेश भर में हड़ताल होगी। रोडवेज की ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने हड़ताल की तैयारियों को लेकर दलबीर किरमारा, हरिनारायण शर्मा व अनूप सहरावत के नेतृत्व में तीन टीमों का गठन किया है। ये तीनों टीमें हड़ताल को सफल बनाने के लिए 23 अगस्त से प्रदेश भर में संपर्क अभियान शुरू कर देंगी।
यह जानकारी देते हुए रोडवेज की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के वरिष्ठ नेता एवं हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष दलबीर किरमारा ने बताया कि परिवहन मंत्री के साथ 13 मई और 13 जून 2017 को रोडवेज यूनियनों व विभाग के उच्चाधिकारियों के बीच कर्मचारियों की लंबित मांगों को लागू करने व रोडवेज का निजीकरण नहीं करने को लेकर समझौता हुआ था। इस समझौते को अभी तक सरकार ने लागू नहीं किया है। इससे रोडवेज कर्मचारियों में भारी रोष है।
दलबीर किरमाना ने प्रदेश के परिवहन मंत्री के उस बयान की आलोचना की है जिसमें उन्होंने कहा है कि भर्ती किए गए 900 नए चालकों को बर्खास्त करने के स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री के पास फाइल भेज दी है। उन्होंने कहा कि परिवहन मंत्री इस प्रकार की धमकी देकर कर्मचारियों पर दबाव बनाने और 700 निजी बसों को चलाने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे रोडवेज कर्मचारी कभी सफल नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि रोडवेज की 500 बसें परिचालकों की कमी के कारण कर्मशाला में खड़ी हैं। इसलिए सरकार चालकों को बर्खासत करने की बजाय परिचालकों की भर्ती लिस्ट जो फाइनल हो चुकी है उसको जारी करे, इससे जहां बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा और रोडवेज की खराब हो रही बसें दोबारा सड़कों पर दौड़ेंगी, जिससे आम जनता को बेहतर सुविधा मिलेगी। वहीं सरकार को बसें किराए पर चलाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
दलबीर किरमाना ने परिवहन मंत्री को सलाह दी है कि जो भी सरकार सत्ता में आती है सत्ता में आने से पहले किसानों, मजदूर, कर्मचारियों, युवाओं व व्यापारियों सहित आम जनता को अनेकों प्रकार के वायदे करती हैं और सत्ता में आते ही उन वायदों को भूला देती हैं। यही नहीं आम जनता को बिजली, पानी, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने का गंभीरता से प्रयास नहीं करती। जो भी वर्ग सरकार को इन मुद्दों को लेकर सरकार को जगाने के लिए संघर्ष करते हैं तो सरकार आम जनता व कर्मचारियों की समस्यओं का समाधान करने की बजाय उनके आंदोलन को दबाने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि 5 सितंबर की हड़ताल रोडवेज के कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर नहीं अपितु प्रदेश में चरमराती परिवहन व्यवस्था में सुधार लाने के लिए तथा आम गरीब जनता, छात्र-छात्राओं को सुविधा देने के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अपने द्वारा किए गए वायदे के अनुसार रोडवेज के बड़े में प्रति वर्ष एक हजार बसें नई शामिल करती तो चार साल में 4 हजार बसें रोडवेज के बेड़े में शामिल हो जाती और प्रदेश के 28 हजार बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलता। दलबीर किरमारा ने कहा कि सरकार को चाहिए कि समय रहते कर्मचारियों की मानी गई मांगों को लागू करके व रोडवेज का निजीकरण बंद करे अन्यथा 5 सितंबर को पूरे प्रदेश में रोडवेज का चक्का जाम होगा, जिसके लिए प्रदेश सरकार जिम्मेवार होगी। उन्होंने कहा कि आम जनता से भी इस हड़ताल को सफल बनाने के लिए सहयोग देने की अपील की है।

