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Pharm D करने वाले कर सकेंगे नाम से पहले ‘डॉ’ इस्तेमाल

नागपुर,
फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने उन कैंडिडेट्स को अपने नाम के आगे ‘डॉ’ लगाने की अनुमति दी है जो किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से डॉक्टर ऑफ फार्मेसी (Pharm D) करेंगे। पीसीआई के पंजीयक और सचिव अर्चना मुदगत ने संता गाडगे बाबा अमरावती यूनिवर्सिटी के परीक्षा और मूल्यांकन बोर्ड के निदेशक को एक पत्र जारी किया है। पत्र में लिखा है, ‘पीसीआई ने उन कैंडिडेट्स को अपने नाम के आगे ‘डॉ’ लगाने की अनुमति देने का फैसला किया है जिनको Pharm D आवंटित की जाएगी। सभी यूनिवर्सिटियों और पीसीआई द्वारा मान्यता प्राप्त परीक्षा आयोजित करने वाली अथॉरिटीज से आग्रह किया जाता है कि वे डिग्री सर्टिफिकेट्स बांटने के समय इस उपसर्ग का इस्तेमाल करें।
भारत में Pharm D कोर्स की शुरुआत 2008 में हुई थी और महाराष्ट्र में इसे 2012 में लॉन्च किया गया था। छह साल के इस कोर्स में शामिल होने वाला पहला बैच 2018 में उत्तीर्ण हुआ था। दूसरे बैच को 2019 के दीक्षांत समारोह में डिग्री मिलेगी। महाराष्ट्र की यूनिवर्सिटियां डिग्री देते समय ‘डॉ’ उपसर्ग का इस्तेमाल नहीं कर रही थीं। इससे असंतुष्ट महाराष्ट्र के डॉक्टर ऑफ फार्मेसी असोसिएशन के सदस्यों ने पीसीआई से इस पर सफाई मांगी थी। वैसे यह स्पष्ट नहीं है कि पीसीआई ने पहले कब इस बात का फैसला किया था कि Pharm D करने वाले कैंडिडेट्स ‘डॉ’ उपसर्ग का इस्तेमाल करेंगे।
महाराष्ट्र के डॉक्टर ऑफ फार्मेसी असोसिएशन के अध्यक्ष विनायक भागवत ने बताया, ‘हम पिछले दो सालों से इस मामले को उठा रहे थे। जब यूनिवर्सिटी अथॉरिटीज ने हमें बताया कि इस संबंध में पीसीआई की ओर से उनको कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है तो हमने पीसीआई को लिखा। फिर 24 मई को पीसीआई ने इस संबंध में पत्र लिखा।’ महाराष्ट्र के रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट असोसिएशन ने पीसीआई के इस कदम का स्वागत किया है।
Pharm D डिग्रीधारकों के मुताबिक, डॉ उपसर्ग इस्तेमाल करने से उनको कई तरह से फायदे होंगे। फार्म डी के एक छात्र अनिकेत भोसले ने बताया, ‘यह उपसर्ग मार्केट में अन्य फार्मा डिग्री धारकों से हमें अलग करेगा। जॉब मार्केट में हमें हमारी पहचान मिलेगी।’

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