हिसार

सर्वश्रेष्ठ विस्तार विशेषज्ञ बनने के लिए सर्वस्पर्शी होना जरूरी : प्रो. के.पी. सिंह

हिसार,
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में हरियाणा एवं दिल्ली राज्यों के कृषि विज्ञान केन्द्रों की राज्य स्तरीय योजना (2020) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। विश्श्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के.पी. सिंह इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे।
प्रो. सिंह ने उपस्थित कृषि विज्ञान केन्द्रों के संयोजकों एवं कृषि वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्रों को अपने कार्य, योजनाओं एवं उनके क्रियान्वयन में अमूल-चूल परिवर्तन लाने की नितांत आवश्यकता है ताकि तेजी से बदलती हुई परिस्थितियों में कृषि विज्ञान केन्द्र अपनी सार्थकता सिद्ध कर सकें। उन्होनें विस्तार विशेषज्ञों से आहवान किया कि सर्वश्रेष्ठ विस्तार विशेषज्ञ बनने के लिए उन्हें सर्वस्पर्शी होना बहुत आवश्यक है। उन्होनें कहा कि भारत में, 86 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत हैं। इसमें से 65 फीसदी किसान 35 साल से कम उम्र के हैं तथा उनकी रूचि खेती की तरफ घटती जा रही हैं जो चिन्ता का विषय है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) सांख्यिकी मंत्रालय, भारत सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, 2016 के दौरान (2012-2013) के तहत, भारत में एक औसत कृषक परिवार ने रु. 6,426 प्रति माह और 2018-19 रिपोर्ट के अनुसार, एक कृषक परिवार की औसत आय बढक़र प्रति माह 10,329 रुपये हो गयी है। इस प्रकार भारत सरकार के लक्ष्य वर्ष 2022 तक हम किसान की आय न केवल दोगुनी बल्कि इससे भी ज्यादा कर सकते है।
उन्होंने किसानों के चहुंमुखी विकास के लिए कृषि विज्ञान केन्द्रों को गतिविधि केन्द्र के रूप में विकसित करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा इस कार्यशाला के दौरान किसानों के हितों को ध्यान में रखकर एक मजबूत, प्रभावी एवं टिकाऊ योजना तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने कहा समय-समय पर सरकार की ओर से किसानों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं शुरू की जाती हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र सुनिश्चित करें कि इन योजनाओं का लाभ किसानों को मिल सके। उन्होनें समन्वित कृषि प्रणाली के समूह बनाने पर जोर दिया।
कृषि तकनीकी अनुप्रयोग संस्थान, जोन-2, जोधपुर के निदेशक डॉ. एस.के. सिंह ने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा के लिए कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों के लिए फसलवार कार्य योजना बनाई जा रही है। इसके अतिरिक्त कृषि व्यवसाय से विमुख हो रहे युवाओं को कृषि से जोडऩे के लिए रोज़गारोमुखी कार्यक्रम भी बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कृषि विज्ञान केन्द्रों की कृषि को बिजनेस मॉडल बनाने की प्राथमिकता होनी चाहिए।
इससे पूर्व विश्श्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. आर.एस. हुड्डा ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यशाला में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के अधीन हरियाणा के 14 कृषि विज्ञान केन्द्रों के वरिष्ठ संयोजकों, एनडीआरआई, करनाल, नई दिल्ली एवं तीन स्वयं सहायता समूहों के संयोजकों ने अपने-अपने कृषि विज्ञान केन्द्रों की कार्य योजनाओं पर प्रस्तूति दी तथा भविष्य की योजनाओं पर मंथन किया।
इस अवसर पर मानव संसाधन एवं प्रबन्धन निदेशक, डॉ. एमएस सिद्धपुरिया, डॉ. अश्वनी कुमार, अटारी जोधपुर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. बीएल जांगिड़ व डॉ. एम.एस. मीणा, डॉ. सूबे सिंह, आदि उपस्थित थे।

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