उत्तर प्रदेश

शव घर तक पहुंचाने के लिए ऐंबुलेंस चालकों ने मांगी रिश्वत

इलाहाबाद
इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक मामला कौशाम्बी जिले में सामने आया है, जिसमें पहले सरकारी डॉक्टरों की लापरवाही से गर्भवती महिला की जान चली गई और फिर उसकी लाश को घर तक पहुंचाने के लिए सरकारी ऐंम्बुलेंस चालकों ने पीड़ित परिजनों से 800 की रिश्वत की मांग कर डाली।
रुपये न होने से मजबूर परिजन मृतक गर्भवती महिला की लाश को स्ट्रेचर पर ही लेकर घर के लिए निकल पड़े। पैदल शव लेकर जाते परिवारवालों की हालत देख मीडिया के दखल के बाद सीएमएस ने पीड़ित परिवार को शव वाहन मुहैया कराया।

कौशाम्बी के जिला अस्पताल में महेश नाम के एक शख्स ने अपनी गर्भवती पत्नी को भर्ती कराया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। महेश का आरोप है कि उसने शव घर ले जाने के लिए ऐंम्बुलेंस मांगी, लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों ने ऐम्बुलेंस सेवा मुहैया कराए जाने के नाम पर 8 सौ रुपये की रिश्वत मांगी। पत्नी और अपने अजन्मे बच्चे की मौत का पहाड़ जैसा दुःख झेल रहे महेश के पास रिश्वत के रुपये न होने पर उसे मजबूरन स्ट्रेचर पर ही खींचकर लाश को लेकर घर के लिए लेकर चलना पड़ा।
महेश करारी थाना इलाके के अहमदीपुर गांव का रहने वाला है। महेश की पत्नी मालती गर्भवती थी, जिसको लेबर पेन शुरू होने पर उसने अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल सराय अकिल सीएचसी में भर्ती कराया था। यहां डॉक्टरों ने मालती की, हालत नाजुक बताकर जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। अस्पताल में रेफर होने के बाद भी कई घंटे तक ऐम्बुलेंस न मिलने पर उसे इंतजार करना पड़ा। बड़े मान-मनौवल के बाद एक सरकारी ऐम्बुलेंस ने मालती को जिला अस्पताल पहुंचाया। हालांकि अस्पताल पहुंची मालती को डॉक्टरों ने देखते ही मृत घोषत कर दिया। इतना ही नहीं सरकारी डॉक्टरों के इशारे पर गर्भवती महिला की लाश को अस्पताल के बाहर लावारिस की तरह छोड़ दिया गया।
अस्पताल में गर्भवती महिला की मौत और लाश को स्ट्रेचर पर घसीटते हुए लेकर जाने की खबर मीडिया को लगी। मीडिया ने पीड़ित की लाश को ऐम्बुलेंस न मुहैया कराए जाने के सवाल पर जिला अस्पताल के चीफ मेडिकल सर्जन डॉ.दीपक सेठ पहले गोल-मोल जवाब देते नज़र आए। हालांकि बाद में सरकारी ऐम्बुलेंस देकर शव को पीड़ित के घर पहुंचाना पड़ा।

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