हिसार,
आर्ट ऑफ़ लिविंग द्वारा तकनीक का सदुपयोग करते हुए ऑनलाइन मेडिटेशन एंड ब्रेथ वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस वर्कशॉप का आयोजन सुबह और शाम दो अलग—अलग समय पर किया गया। शाम के समय में केवल 18-30 साल के युवाओं के लिए आयोजन किया गया था। ऑनलाइन वर्कशॉप का संचालन सुमेरु संध्या स्टेट कॉर्डिनेटर नीरज गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में पूरे देश के कई हिस्से से प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
नीरज गुप्ता ने बताया कि इस लॉकडाउन में जब हमें अनावश्यक बाहर नहीं जाना चाहिए तो इस समय का फायदा लेते हुए अपने अंदर जाना चाहिए। अक्सर हम अपने जीवन पर तनाव से होने वाले प्रभाव से अपरिचित रहते हैं। प्राय: हमारा मन भूतकाल को लेकर क्रोध या पश्चाताप की जकड़ में रहता है अथवा भविष्य को लेकर चिंतित रहता है। मन के इस व्यवहार के कारण हमारे और हमारे आसपास के लोगों पर दुष्प्रभाव तो पड़ता ही है, साथ ही हमारी कार्यकुशलता भी प्रभावित होती है। श्वास हमारे शरीर और मन के बीच की कड़ी है, इसलिए यह मन और नकारात्मक भावनाओं को संभालने का साधन भी है और व्यवसाय, घर या खाली समय में अपनी सही क्षमता को अनुभव करने का माध्यम भी। नीरज गुप्ता ने बताया कि हमारे श्वास लेने की प्रक्रिया हमारी भावनाओं के साथ बदलती है, जब भी हमको क्रोध आता है, हम श्वास छोटी व तेज़ गति से श्वास लेते है। जब हम आराम व सुखमयी स्थिति में होते हैं, तब हम लंबी व गहरी श्वास लेते हैं। इससे यही तात्पर्य निकाला जा सकता है कि हमारी श्वास हमारी भावनाओं के साथ जुड़ी हुई है। हमारे भीतर की नकारात्मक भावनाओं को श्वास द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। ऑनलाइन मेडिटेशन एंड ब्रेथ वर्कशॉप के प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के समापन पर अपने अनुभव सांझा करते हुए बताया कि सुदर्शन क्रिया करने के बाद उन्हे अनावश्यक मानसिक वृत्तियों से मुक्ति मिली है। वह पहले से और अधिक ऊर्जावान और स्वस्थ शरीर का अनुभव कर रहे है। युवाओं ने बताया कि उन्हे शरीर में नयी ऊर्जा का प्रवाह अनुभव कर रहे है, वार्तालाप में आत्म-विश्वास एंव पढ़ाई करने में एकाग्रता बढ़ी है। आर्ट ऑफ़ लिविंग की ओर से अगला ऑनलाइन मेडिटेशन एंड ब्रेथ वर्कशॉप 2 से 5 जुलाई तक सुबह-शाम को होगा।