हिसार

सुन हिटलर मेरे देश के, बना काफिले चल पड़े हैं अब किसान मेरे देश के

सुन हिटलर मेरे देश के।
बना काफिले चल पड़े हैं,
अब किसान मेरे देश के।

बुनियाद तेरी हिल्ला देंगे,
सुन हिटलर मेरे देश के।

हो गई है जनता वाकिफ,
बहरुपिए तेरे हर भेष से।

लाठियां-गोलियां खाएंगे हम,
डरे कब है जेल और केस से।

उठो किसानों को उजाड़ देंगे,
तीनों कानून खिलाफ है देश के।

लूटे बैंक, बेचे सरकारी संसाधन
विदेश भाग जाएंगे, ये देश बेच के।

बेरिकेट, वाटर केनन, कंटीले तार
रोक नहीं पाएंगे,गोले आंसू_गैस के।

नामो निसां तक मिटा देंगे,
हम किसान, अब तेरे अवशेष के।

सरदानन्द राजली
9416319388

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Jeewan Aadhar Editor Desk