हिसार

रोडवेज नेताओें के नाजायज तबादलों के खिलाफ कर्मचारियों ने किया जोरदार प्रदर्शन

तबादले रद्द न होने पर प्रदेशभर में कड़ा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी

रोडवेज कर्मचारियों ने किया किसान आंदोलन का समर्थन, सरकार के किसान विरोधी रवैये की निंदा

हिसार,
रोडवेज तालमेल कमेटी के हिसार डिपो के पांच नेताओं के दूर—दराज के डिपुओं में तबादला किये जाने के रोषस्वरूप रोडवेज कर्मचारियों ने मंगलवार को हिसार डिपो में महाप्रबंधक एवं विभागीय अधिकारियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने चेताया कि यदि बदले की भावना से किए गए ये तबादले रद्द नहीं किए गए तो विभागीय अधिकारी कड़ा आंदोलन झेलने के लिए तैयार रहें। इसके साथ ही रोडवेज कर्मचारियों ने देश में चल रहे किसान आंदोलन का भी जोरदार समर्थन किया और प्रधानमंत्री से किसानों की बात सुनने की मांग करने के साथ—साथ भाजपा सरकार को इस बात के लिए चेताया गया कि वह किसानों में जाति व क्षेत्र का भेदभाव करके फूट डालने का प्रयास न करें।
रोडवेज डिपो में किए गए प्रदर्शन की अध्यक्षता राजपाल नैन, सूरजमल पाबड़ा, अरूण शर्मा व राजकुमार चौहान ने संयुक्त रूप से की। इस दौरान विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि पिछले दिनों रोडवेज तालमेल कमेटी ने 13 दिन तक धरना व भूख हड़ताल की, जिसके चलते यातायात प्रबंधक के माध्यम से डिपो महाप्रबंधक ने तालमेल कमेटी से बात की। इस बातचीत के दौरान महाप्रबंधक ने तालमेल कमेटी की सभी मांगों को जायज मानते हुए तयबद्ध समय में उन्हें पूरा करने का आश्वासन दिया। साथ ही जीएम ने आश्वासन दिया था कि किसी भी कर्मचारी पर किसी तरह की प्रताड़ना की कार्रवाई नहीं होगी। इसके बावजूद महाप्रबंधक ने वादाखिलाफी करते हुए रोडवेज तालमेल कमेटी के ​वरिष्ठ नेता राजपाल नैन, राजू बिश्नोई, सूरजमल पाबड़ा, अरूण शर्मा व रमेश यादव के खिलाफ मुख्यालय को अर्ध सरकारी पत्र लिख दिया, जिसके चलते इन नेताओं का दूर—दराज के डिपुओं में तबादला कर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से कर्मचारियों की आवाज दबने वाली नहीं है। प्रदेश सरकार एवं डिपो महाप्रबंधक को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना चाहिए, अन्यथा कर्मचारी कोई भी कड़ा आंदोलन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि महाप्रबंधक की लेट—लतीफी व समय पर कार्यालय न आना, कर्मचारियों की बढ़ती समस्याओं का प्रमुख कारण है। महाप्रबंधक आमतौर पर अपने कार्यालय में दोपहर को दो या तीन बजे आते हैं और पांच बजे वापिस चले जाते हैं, जिसके चलते कर्मचारियों के अधिकतर कार्य लंबित हो गए हैं। जब इन कार्यों को पूरा करने के लिए आवाज उठाई जाती है तो आवाज उठाने वालों को तबादलों या अन्य तरह की प्रताड़ना की कार्रवाई से दबाने का प्रयास किया जाता है।
वक्ताओं ने कहा कि प्रताड़ना की कार्रवाई के खिलाफ पहले भी आंदोलन हुए हैं और कर्मचारियों ने वे आंदोलन जीते भी हैं। अब भी ये पांचों कर्मचारी किसी तरह के दबाव में आने की बजाय कर्मचारियों के हितों के लिए लड़ने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की कार्रवाई के खिलाफ अधिकारियों को मुंहतोड़ जवाब नहीं दिया गया तो उनका हौंसला और बढ़ जाएगा और ऐसे में ये अधिकारी कर्मचारियों का सांस लेना भी दूभर कर देंगे। वक्ताओं ने मांग की कि महाप्रबंधक की कार्यप्रणाली की जांच कराई जाए। उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि अगर मांगो को लेकर किया गया आन्दोलन गलत था या उठाई गई समस्याएं अनुचित थी तो कर्मचारी के तबादलों की बजाय उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए औरर अगर महाप्रबंधक ने नियमों के विरुद्ध गैर कानूनी कार्य किया है तो महाप्रबंधक के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जाए।
इस दौरान सभी वक्ताओं ने देशभर में चल रहे किसान आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया और प्रधानमंत्री, गृ​ह मंत्री व कृषि मंत्री से मांग की कि वे समय रहते आंदोलनकारी किसानों की मांगे माने। प्रधानमंत्री पिछले 6 साल से अपने मन की बात जनता को सुना रहे हैं लेकिन अब समय है कि वे किसानों व आम जनता के मन की बात भी सुन लें अन्यथा देश का अन्नदाता यदि कुपित हो गया तो भाजपा को कहीं का नहीं छोड़ेगा। उन्होंने सत्तापक्ष द्वारा किसानों को खालिस्तान समर्थक, आतंकवादी बताए जाने की निंदा करते हुए कहा कि यह सब राजनीति के ​घटियापन की पराकाष्ठा है। दिन—रात मेहनत करके देश का पेट पालने वाले किसान को धर्म, संप्रदाय व क्षेत्रवाद के नाम पर बांटने की साजिशें हो रही है जो निंदनीय है। यदि भाजपा सरकार घटिया कामों में​ जितनी मेहनत कर रही है, उसकी आधी मेहनत ही किसानों व जनता की बात सुनने में लगाए तो समस्या का समाधान हो सकता है। उन्होंने कहा कि पूरा कर्मचारी वर्ग इस समय किसानों के साथ हैं।
इस दौरान कर्मचारियों ने रोडवेज महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष तथा रोडवेज प्रांगण से बस अड्डा परिसर तक जोरदार प्रदर्शन किया और नाजायज तबादले तुरंत रद्द करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही तबादले रद्द नहीं हुए तो प्रदेशभर में आंदोलन की घोषणा कर दी जाएगी, जिसकी जिम्मेवारी महाप्रबंधक व विभाग के उच्चाधिकारियों की होगी। इस अवसर पर मुख्य रूप से राजबीर सिंधु, एम.एल. सहगल, रूप सिंह बोस, भागीरथ शर्मा, रमेश सैनी, सत्यवान बधाना, राजू बिश्नोई, सतीश गुरी, धर्मपाल सैनी, नरेन्द्र खरड, बलजीत मसूदपूर आदि ने संबोधित किया। इस अवसर पर उपरोक्त के अलावा भागीरथ शर्मा, रमेश माल, राजबीर पेटवाड, राजबीर बुडाना, विजयपाल, रामफल कादयान, विकास कुंडू, कुलदीप सिंह, रामपाल बामल, विजय बधवार, कृष्ण कुमार, हवा सिंह बिश्नोई आदि मौजूद थे।

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