नागरिकों तक उत्तम स्वास्थ्य पहुंचाने की रास्ता प्रशस्त कर रही सरकार
हिसार,
सीसीआईएम और केंद्र सरकार ने आईएसएम से पोस्ट ग्रेजुएट किए हुए डॉक्टर्स को सर्जरी की प्रक्रियाओं की देशभर में प्रामाणिकता देने का कार्य करके सराहनीय और देश के हर नागरिक तक उत्तम स्वास्थ्य पहुंचाने की राह में बड़ा कदम रखा है। अफसोस की बात है कि बिना सत्य जाने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सरकार के सराहनीय कदम का विरोध किया है और सरकार के इस निर्णय के विराध में राष्ट्रव्यापी हड़ताल की गई है। आईएमए का यह कार्य दुर्भाग्यपूर्ण व कुंठित व्यावसायिक मानसिकता को दर्शाता है।
यह बात नेशनल इंटीग्रेटिड मेडिकल एसोसिएशन के प्रधान एवं वरिष्ठ राज्य उपप्रधान डॉ. अशोक यादव व सचिव विनय शर्मा ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। उन्होंने कहा कि कि आईएमए ऐसा केवल पेशेवर ईष्र्या के चलते कर रहा है और देश के सार्वजनिक हित को ताक पर रख रहा है। चिकित्सा जगत में पूर्ण रूप से पढाई करके चिकित्सा सेवा करना एक चिकित्सक का हक है। आईएसएम चिकित्सक भी केंद्र सरकार के पाठयक्रम व नियम अनुसार परीक्षा पास करके बीएएमएस में दाखिला लेता है और सभी मॉडर्न सब्जेक्टस व आयुर्वेद सब्जेक्टस होते हैं। उनको पास करके के बाद इंटनर्शिप कर बीएएमएस की डिग्री लेता है। नीट की परीक्षा पास करके 3 साल की पीजी शल्य का कोर्स करता है। यह शल्य क्रम की मॉडर्न सब्जेक्टस व आयुर्वेद सब्जेक्टस की पूरी पढ़ाई व प्रेक्टिकल करके एमएस बनता है और तभी व सर्जरी कर सकता है। यह प्रक्रिया बीएएमएस और एमबीबीएस और एमएस सर्जरी व एमडी शलस के लिए एक समान है। आईएमए संगठन के पदाधिकारियों व सदस्यों द्वारा इसको खिचड़ीकरण कहकर उपहास करना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यह आचार्य सुश्रुत की पद्धति है और 5 हजार साल पुरानी है। इसी में से मॉडर्न चिकित्सा निकली है। आईएसएम के डॉक्टर्स निजी प्रेक्टिस के अलावा सरकार की कई नीतियों एनआरएचएम, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान, कोविड और अन्य सरकारी चिकित्सा नीतियों में सरकार के साथ काम करके देश की स्वास्थ्य सेवा को दूर दराज इलाकों तक पहुंचा रहे हैं, जहां एमबीबीएस या आईएमए के डॉक्टर नहीं जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से देश की जनता को अधिक से अधिक सामान्य सर्जन, नाक, कान व गले की बीमारियों के सर्जन व आई सर्जन मिलेंगे। नीमा संगठन सरकार के इस कदम का स्वागत करता है।