धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—245

किसी गांव में एक व्यक्ति को गांव के सभी लोग अशुभ मानते थे। गांव के लोगों की सोच उस व्यक्ति के लिए नकारात्मक बन गई थी। पूरे गांव में ये बात फैल गई कि सुबह-सुबह इस व्यक्ति का चेहरा देख लेते हैं तो पूरा दिन बर्बाद हो जाता है।

लोग उस व्यक्ति को गांव से भगाने की कोशिश करने लगे। जब ये बात वहां के राजा को मालूम हुई तो राजा ने उस व्यक्ति को अपने महल ही रहने के लिए कह दिया, क्योंकि राजा खुद इस बात को परखना चाहता था कि वह व्यक्ति अशुभ है या नहीं।

अगले दिन राजा ने सबसे पहले उस व्यक्ति का चेहरा देखा, जिसे सभी अशुभ मान रहे थे। उस दिन सुबह से शाम तक राजा को खाना ही नहीं मिला, वह पूरे दिन काम में व्यस्त रहा और उसे भूखे रहना पड़ा। शाम होते-होते तो राजा ने भी ये मान लिया कि ये व्यक्ति सचमुच अशुभ है। इसकी वजह से मुझे दिनभर भूखा रहना पड़ा।

राजा ने उस व्यक्ति को मृत्यु दंड दे दिया। तभी राजा के विद्वान मंत्री ने राजा से पूछा कि आप इस निर्दोष को मृत्यु दंड क्यों दे रहे हैं?

राजा ने कहा कि पूरा गांव इसे अशुभ मानता है और आज मैंने भी इसकी परीक्षा ली तो मुझे समझ आया कि ये व्यक्ति तो सचमुच अशुभ है। आज सुबह मैंने इसका चेहरा देखा था, मुझे दिनभर खाना नहीं मिला है।

मंत्री ने कहा कि राजन् क्षमा करें, लेकिन इस व्यक्ति ने तो आज सुबह सबसे पहले आपका चेहरा देखा था। आपको तो सिर्फ खाना नहीं मिला है, लेकिन इस व्यक्ति के सामने तो प्राणों का संकट खड़ा हो गया है। अब आप ही सोचिए कौन ज्यादा अशुभ है।

ये बात सुनते ही राजा को समझ आ गया कि मंत्री सही बोल रहा है। मंत्री ने आगे कहा कि राजन् किसी भी व्यक्ति का चेहरा अशुभ नहीं होता है। चेहरा तो ईश्वर की देन है। अशुभ तो हमारी सोच है। सोच जैसी होगी, हमें दूसरे लोग भी वैसे ही दिखाई देंगे।

राजा को मंत्री की बातें समझ आ गईं और राजा ने उस व्यक्ति को छोड़ दिया।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, हमारी सोच नकारात्मक होगी तो हमें हर जगह नकारात्मकता ही दिखाई देगी। जब हम सकारात्मक सोचने लगते हैं तो सारी बातें सकारात्मक हो जाती हैं। इसलिए हमें अच्छा सोचना चाहिए और बुरे विचारों से बचना चाहिए।

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