बहुत समय पहले की बात है। एक विशाल खेत में हल चलाने के बाद मिट्टी नरम और उपजाऊ हो गई थी। हवा चल रही थी और आसमान से हल्की-हल्की बूंदें बरस रही थीं। उसी खेत की मिट्टी में दो छोटे-छोटे बीज आ गिरे। दोनों बीज एक-दूसरे के पास पड़े थे। दिखने में बिल्कुल समान, पर उनके विचार अलग-अलग थे।
पहला बीज बहुत आशावादी था। उसने मन ही मन सोचा – “मैं धरती की गोद में पड़ा रहकर क्या करूँगा? मेरा जन्म तो बड़ा बनने के लिए हुआ है। मुझे मिट्टी को चीरकर बाहर आना है। मैं अंकुरित होकर पौधा बनूँगा और फिर एक दिन मजबूत पेड़ बनकर आकाश को छू लूँगा। मेरी शाखाओं पर पक्षी घोंसला बनाएँगे, लोग मेरी छाया में आराम करेंगे और मैं धरती का आभूषण बन जाऊँगा।”
उसके भीतर हिम्मत थी। उसने बिना देर किए मिट्टी की परतों को तोड़ना शुरू किया। शुरुआत कठिन थी। चारों तरफ अंधेरा था, मिट्टी भारी थी, पर बीज ने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे उसने एक नन्ही-सी कोपल बाहर निकाल दी। सूरज की किरणें उसे छूकर जैसे कह रही थीं – “शाबाश! यही जीवन का रास्ता है।”
दूसरी ओर दूसरा बीज बहुत डरपोक था। उसने अपने मित्र बीज को देखा और बोला – “तू बाहर क्यों जा रहा है? बाहर बहुत खतरे हैं। सूरज की तपिश तुझे जला सकती है, बारिश तुझे बहा ले जाएगी, पक्षी तुझे खा जाएँगे। बेहतर यही है कि हम मिट्टी के भीतर ही सुरक्षित रहें। यहाँ अंधेरा है, लेकिन कम से कम खतरा तो नहीं है। मैं बाहर नहीं निकलूँगा।”
पहले बीज ने समझाने की कोशिश की – “देखो, जीवन का असली आनंद जोखिम उठाने में है। अगर हम ऊपर नहीं आएँगे तो हम कभी पेड़ नहीं बन पाएँगे। हमारी पहचान तभी बनेगी जब हम आगे बढ़ेंगे।” लेकिन दूसरा बीज नहीं माना। वह डर के खोल में ही सिमटा रहा।
समय बीतता गया। वह पहला बीज अब पौधा बन चुका था। धीरे-धीरे उसकी जड़ें गहरी और मजबूत होती गईं। उसकी शाखाएँ फैलने लगीं। पंछी उसकी डालों पर आकर चहचहाते, बच्चे उसकी छाँव में खेलते और राहगीर उसकी छाया में विश्राम करते। वह बीज सचमुच एक बड़े पेड़ में बदल गया और सबके लिए उपयोगी बन गया।
दूसरा बीज अब भी मिट्टी के भीतर पड़ा था। पर धीरे-धीरे उसने जीवन की शक्ति खो दी। न जड़ें निकलीं, न अंकुर फूटा। मिट्टी में पड़ा-पड़ा वह सड़-गल गया और उसका अस्तित्व ही समाप्त हो गया।
इस तरह दोनों बीजों का भाग्य अलग-अलग निकला। एक ने साहस दिखाया और पूरी दुनिया को लाभ पहुँचाया। दूसरा डर में जीता रहा और अंत में उसका जीवन व्यर्थ चला गया।
धर्मप्रेमी सुंदर साथ जी, डरकर छिप जाने से जीवन नहीं बदलता।जो व्यक्ति चुनौतियों का सामना करता है, वही आगे बढ़कर अपने सपनों को साकार करता है। मुश्किलें जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन उनसे बचने वाला कभी सफलता नहीं पा सकता। हिम्मत और विश्वास ही हमें ऊँचाइयों तक पहुँचाते हैं।