धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से— 573

रामायण में श्रीराम का राज्याभिषेक होने वाला था। सबकुछ तय हो गया था। ये राजा दशरथ ने तय किया था तो ये बात बदलने की संभावनाएं भी नहीं थीं। जिस दिन राज्याभिषेक होने वाला था, ठीक उससे एक दिन पहले कैकयी को मंथरा को भड़का दिया।

मंथरा की बातों में कैकयी ऐसी उलझी कि उसने राजा दशरथ से अपने दो वर मांग लिए। पहला वर भरत को राज और दूसरा वर राम को वनवास।

राजा दशरथ अपने वचन निभाने के लिए मजबूर हो गए। कैकयी ने अपनी जिद राजा से पूरी करवा ली। दशरथ ने जब राम को बुलाया और ये बातें बताईं तो उन्होंने धैर्य और शांति बनाए रखी। पिता की पूरी बात ध्यान से सुनी और उनके वचन पूरे करने के लिए राम वनवास जाने के लिए तैयार हो गए।

जब राम का राज्याभिषेक होना था, उसी समय में राम को वनवास हो गया। रातों-रात हालात एकदम बदल गए थे। मुश्किल समय में भी राम ने धैर्य नहीं खोया और शांति से काम लिया। ऐसे समय में भी राम जी ने अपनी सकारात्मक बनाए रखी। श्रीराम के साथ ही लक्ष्मण और सीता भी वनवास के लिए चल दिए।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, इस लीला के माध्यम से श्रीराम ने हमें ये सीख दी है कि हालात कभी भी बदल सकते हैं, हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार और सकारात्मक रहना चाहिए। अगर हम मुश्किल हालात में धैर्य खो देंगे तो जीवन बर्बाद हो सकता है। मुश्किलों में भी मन शांत रखना चाहिए, तभी सब ठीक हो सकता है।

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