धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—827

एक महान संत के पास एक व्यक्ति पहुँचा जो पूरी तरह टूट चुका था। उसने कहा, “महाराज, मैंने सब कुछ खो दिया है। व्यापार डूब गया, अपने साथ छोड़ गए। अब कुछ नहीं हो सकता, बस अंत बचा है।”

संत ने शांति से उसकी ओर देखा और ज़मीन पर एक बड़ा ‘0’ (शून्य) बना दिया।

उन्होंने पूछा, “यह क्या है?”
व्यक्ति ने कहा, “यह शून्य है। खालीपन है। कुछ भी नहीं।”

संत मुस्कुराए और बोले, “यही तुम्हारी सबसे बड़ी ताकत है। जब जीवन में ‘सब कुछ’ खत्म हो जाता है, तो असल में सीमाएं खत्म हो जाती हैं। जब तुम्हारे पास खोने को कुछ नहीं बचता, तब तुम्हारे पास पाने के लिए पूरा ब्रह्मांड होता है।”

चमत्कार तब नहीं होता जब आसमान से कुछ गिरता है, बल्कि तब होता है जब आपका दृष्टिकोण बदलता है। जिसे आप ‘अंत’ समझ रहे हैं, वह असल में एक ‘नई शुरुआत’ के लिए खाली की गई जगह है।

जब पीछे हटने का रास्ता बंद हो जाता है, तो इंसान की सोई हुई शक्तियाँ जागती हैं। यही चमत्कार है। व्यक्ति का हौंसला बढ़ चुका था। और उसने नेगटिव सोच को छोड़कर धैर्य के साथ प्रकृति की नीयति को देखने का निर्णय लिए।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, जब आप लड़ना बंद करके ‘स्वीकार’ करना शुरू करते हैं, तो मानसिक शांति का चमत्कार घटता है। “चमत्कार यह नहीं कि आप पानी पर चलें, चमत्कार यह है कि आप इस उथल-पुथल भरे जीवन में शांति से चल सकें।” जब हमें लगता है कि “अब कुछ नहीं हो सकता”, तो असल में हम अपने पुराने तरीकों की बात कर रहे होते हैं। कुदरत के पास हमें रास्ता दिखाने के करोड़ों नए तरीके हैं जो हमारी बुद्धि की समझ से परे हैं। ये रस्ते हमें समय आने पर दिखाई देते है।

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