एक बार एक महान संत, स्वामी ब्रह्मानंद जी, एक नए गाँव में पधारे। वे बहुत शांत और ज्ञानी थे। उन्होंने गाँव के बाहर एक छोटे से खाली मैदान में अपना आश्रम बनाने का निर्णय लिया।
लेकिन उस गाँव में कालिया नाम का एक बहुत ही झगड़ालू और नास्तिक व्यक्ति रहता था। उसे साधु-संतों से सख्त नफरत थी। जब उसने देखा कि स्वामी जी वहां आश्रम बना रहे हैं, तो उसे बहुत गुस्सा आया।
कालिया ने तय किया कि वह स्वामी जी को वहां टिकने नहीं देगा।
अगले दिन से, जब भी स्वामी जी धूनी रमाकर बैठते या निर्माण कार्य शुरू करते, कालिया वहां आता और उन पर पत्थर फेंकने लगता। वह उन्हें गंदी गालियां देता और कंकड़-पत्थर मारकर उन्हें भगाने की कोशिश करता।
स्वामी जी के शिष्यों को बहुत गुस्सा आता। वे कालिया को मारने के लिए उठते, लेकिन स्वामी जी उन्हें रोक देते। स्वामी जी चुपचाप उन पत्थरों को उठाते जो कालिया ने फेंके थे, और उन्हें एक कोने में जमा कर देते।
यह सिलसिला महीनों तक चला। कालिया रोज़ आता, पत्थर फेंकता, गालियां देता और चला जाता। स्वामी जी मुस्कुराते, पत्थर उठाते और अपने काम में लग जाते।
कुछ समय बाद, कालिया बीमार पड़ गया और एक महीने तक घर से नहीं निकल पाया। जब वह ठीक हुआ, तो उसने सोचा, “चलो देखूँ, वो पाखंडी बाबा भाग गया या नहीं।”
वह गुस्से में आश्रम की जगह पहुँचा। लेकिन वहां का नज़ारा देखकर उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
वहां एक सुंदर और मज़बूत कुटिया तैयार खड़ी थी।
कालिया हैरान था। वह दबे पांव अंदर गया। उसने देखा कि स्वामी जी ध्यान में बैठे हैं। कालिया ने हिम्मत करके पूछा, “बाबा, मैं तो रोज़ आपको पत्थर मारता था, आपको भगाता था। फिर आपने यह आश्रम कैसे बना लिया?”
स्वामी जी ने आंखें खोलीं, मुस्कुराए और दीवार की ओर इशारा करते हुए बोले: “बेटा, ध्यान से देख। इस आश्रम की यह जो मज़बूत चारदीवारी है न, यह उन्हीं पत्थरों से बनी है जो तूने मुझे उपहार में दिए थे।”
कालिया सन्न रह गया।
स्वामी जी ने आगे समझाया: “अगर मैं तेरे फेंके हुए पत्थर वापस तुझ पर फेंकता, तो शायद तेरा सर फूट जाता और मेरा भी नुकसान होता। लेकिन मैंने उन पत्थरों को इकट्ठा किया और अपनी सुरक्षा के लिए दीवार बना ली। अब न तू मुझे देख सकता है, न तेरे पत्थर मुझ तक पहुँच सकते हैं।”
स्वामी जी ने उसके सिर पर हाथ रखा और कहा: “बेटा, दुनिया जब नफरत के पत्थर फेंके, तो उन्हें जवाब देने में समय बर्बाद मत करो। उन पत्थरों से अपनी सफलता का किला बना लो, ताकि वो लोग बस बाहर खड़े होकर तुम्हारी ऊंचाई देखते रह जाएं।”
कालिया उनके चरणों में गिर पड़ा और उस दिन से उनका सबसे बड़ा सेवक बन गया।
धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, लोग आपकी निंदा करेंगे, ताने मारेंगे। यह आप पर निर्भर करता है कि आप उन तानों से अपना दिल दुखाते हैं या उन्हें अपनी ‘जिद’ और ‘ईंधन’ बना लेते हैं। ईंट का जवाब पत्थर से देने वाला सिर्फ शोर मचाता है, लेकिन ईंटों को जोड़कर महल बनाने वाला इतिहास रचता है। दुनिया आपको गिराने के लिए जो भी फेंके, उसे अपने निर्माण में लगा लीजिये।








