धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से—822

एक बार की बात है, एक नगर में रमन नाम का एक बहुत ही महत्वाकांक्षी युवक रहता था। उसने कम उम्र में ही अपार धन और व्यापार में बड़ी सफलता हासिल कर ली थी। दुनिया की नज़रों में वह एक बेहद सफल इंसान था, लेकिन अंदर से वह हमेशा बेचैन और असंतुष्ट रहता था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसके जीवन की सही दिशा क्या है और सच्ची सफलता किसे कहते हैं।

अपने मन की शांति की तलाश में वह नगर के बाहर कुटिया में रहने वाले एक ज्ञानी संत के पास पहुँचा।

रमन ने संत को प्रणाम किया और पूछा, “महाराज, मेरे पास सब कुछ है—धन, यश और ऐश्वर्य। फिर भी मेरा मन उदास रहता है। मुझे जीवन की सही दिशा नहीं मिल रही। कृपया मुझे बताएं कि सच्ची सफलता क्या है और इसे कैसे पाया जाए?”

संत मुस्कुराए और बोले, “तुम्हारे सवाल का जवाब मैं तुम्हें दूँगा, लेकिन उससे पहले तुम्हें आज का पूरा दिन मेरे साथ बिताना होगा।” रमन तुरंत तैयार हो गया।

संत अपनी कुटिया से निकले और रमन उनके पीछे-पीछे चलने लगा। रास्ते में उन्होंने कुछ ऐसे काम किए जो रमन को बहुत साधारण लगे:

पहला काम: रास्ते में एक बड़ा सा पत्थर पड़ा था, जिससे कई लोगों को ठोकर लग रही थी। संत ने रुककर उस भारी पत्थर को रमन की मदद से किनारे कर दिया।

दूसरा काम: बाजार से गुजरते हुए संत ने एक गरीब फल वाले से बिना मोल-भाव किए कुछ फल खरीदे और वहीं पास में बैठे कुछ भूखे बच्चों में बाँट दिए।

तीसरा काम: दोपहर की कड़ी धूप में एक कुत्ता प्यास से तड़प रहा था। संत ने एक मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर उस बेजुबान को पिलाया।

पूरे दिन में संत ने रमन को कोई बड़ा उपदेश नहीं दिया, बस वे ऐसे ही छोटे-छोटे काम करते रहे। शाम ढलने पर वे वापस कुटिया लौट आए।

कुटिया पर पहुँचकर संत ने रमन से पूछा, “बेटा, आज पूरा दिन तुमने मेरे साथ बिताया। अब मुझे बताओ कि आज तुम्हें कैसा महसूस हो रहा है?”

रमन ने गहराई से साँस ली और आश्चर्य से बोला, “महाराज, आज मैंने कोई व्यापार नहीं किया, कोई बड़ा मुनाफा नहीं कमाया, फिर भी आज मेरे मन में एक अजीब सी शांति और गहरी खुशी है। ऐसा सुकून मैंने सालों से महसूस नहीं किया था।”

संत ने स्नेहपूर्वक रमन के कंधे पर हाथ रखा और कहा: “यही तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है। जहाँ प्रसन्नता है, वहीं जीवन की सही दिशा है। सच्ची सफलता किसी बहुत बड़े मुकाम को हासिल करने या सिर्फ धन कमाने में नहीं है, बल्कि हर दिन किए गए छोटे-छोटे अच्छे कामों में है।”

संत ने आगे समझाया कि जब हम निस्वार्थ भाव से किसी की मदद करते हैं, तो हमारे भीतर एक सच्ची खुशी जन्म लेती है। यही खुशी हमें बताती है कि हम जीवन के सही मार्ग पर चल रहे हैं। छोटी-छोटी भलाइयों से ही जीवन को सार्थकता मिलती है और यही आत्मा की सच्ची सफलता है।

रमन को अपने जीवन की दिशा मिल चुकी थी। वह समझ गया कि बड़ा लक्ष्य रखना गलत नहीं है, लेकिन उस यात्रा में छोटे-छोटे अच्छे कामों और दूसरों की खुशी को शामिल करना ही सच्ची सफलता है।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, मन की शांति और सच्ची खुशी ही यह तय करती है कि आप सही रास्ते पर हैं। सफलता केवल बैंक बैलेंस से नहीं, बल्कि आपके द्वारा किए गए अच्छे कर्मों से मापी जाती है। किसी बड़े बदलाव का इंतज़ार करने के बजाय, हर दिन छोटे-छोटे नेक काम करें।

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Jeewan Aadhar Editor Desk