धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से— 861

एक राजा को नए-नए खिलौने खरीदने का बहुत शौक था। उसके दरबार में समय-समय पर दूर-दूर से व्यापारी आते और अनोखी वस्तुएं प्रस्तुत करते। एक दिन एक व्यापारी दरबार में आया और आत्मविश्वास से बोला, “राजन्, आज मैं आपको ऐसे खिलौने दिखाने वाला हूं, जो आपने पहले कभी नहीं देखे होंगे।”

राजा उत्सुक हो उठा। उसने तुरंत व्यापारी को अपने खिलौने दिखाने का आदेश दिया। व्यापारी ने अपने झोले से तीन सुंदर पुतले निकाले। देखने में तीनों बिल्कुल एक जैसे थे, पर उनकी कीमतें अलग-अलग थीं। पहले की कीमत एक लाख मोहरें, दूसरे की एक हजार मोहरें और तीसरे की केवल एक मोहर।

राजा और दरबारियों को यह बात बहुत अजीब लगी। सभी ने पुतलों को ध्यान से देखा, पर उनमें कोई अंतर समझ नहीं आया। तब राजा ने अपने बुद्धिमान मंत्री से इस रहस्य को समझाने के लिए कहा।

मंत्री ने ध्यानपूर्वक पुतलों का निरीक्षण किया और एक सेवक से कुछ तिनके मंगवाए। उसने पहले पुतले के कान में तिनका डाला। तिनका उसके पेट में चला गया और थोड़ी देर बाद उसके होंठ हिले और फिर बंद हो गए। दूसरे पुतले के कान में तिनका डाला तो वह सीधे दूसरे कान से बाहर निकल गया। तीसरे पुतले के कान में तिनका डालते ही उसका मुंह खुल गया और वह जोर-जोर से हिलने लगा।

मंत्री ने मुस्कुराते हुए समझाया, “राजन्, ये पुतले हमें जीवन की गहरी सीख देते हैं। पहला पुतला उन लोगों का प्रतीक है जो बातों को ध्यान से सुनते हैं, उन्हें समझते हैं, सत्यता परखते हैं और फिर ही कुछ कहते हैं। इसलिए इसकी कीमत सबसे अधिक है।”

“दूसरा पुतला उन लोगों को दर्शाता है जो एक कान से सुनते हैं और दूसरे से निकाल देते हैं। उन्हें किसी बात से फर्क नहीं पड़ता, वे लापरवाह होते हैं।”

“तीसरा पुतला उन लोगों जैसा है जो बिना सोचे-समझे हर बात पर प्रतिक्रिया देते हैं और बिना सत्य जाने उसे फैलाते हैं। ऐसे लोगों का मूल्य बहुत कम होता है।” राजा और दरबारियों को यह सीख समझ में आ गई कि अगर हम सही तरीके से सुनना, समझना और बोलना सीख जाएं, तो जीवन सफल और संतुलित हो जाएगा। राजा ने उस व्यापारी से तीनों पुतले खरीद लिए।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, अधूरी जानकारी पर प्रतिक्रिया देने से गलतफहमियां पैदा होती हैं। एक अच्छा श्रोता ही सही निर्णय ले सकता है। आज के समय में लोग तुरंत प्रतिक्रिया देने लगते हैं, लेकिन समझदारी इसी में है कि पहले सोचें, फिर बोलें। बिना जांचे-परखे बातें इधर-उधर फैलाना आपके व्यक्तित्व को कमजोर करता है। इससे विश्वास कम होता है और रिश्ते भी खराब हो सकते हैं। इसलिए सोच-विचार कर किसी बात को आगे बढ़ाएं।

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Jeewan Aadhar Editor Desk

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