धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से— 862

एक छोटे से गाँव में विराज नाम का युवक रहता था। वह मेहनती था, लेकिन जीवन में लगातार संघर्षों से घिरा हुआ था। व्यापार में घाटा, मित्रों का साथ छूटना और परिवार की जिम्मेदारियाँ—सब कुछ एक साथ उस पर आ पड़ा।

जब तक उसके पास पैसा और सफलता थी, तब तक उसके आसपास कई लोग थे। हर कोई दोस्त बनने को तैयार था। लेकिन जैसे ही मुश्किल समय आया, एक-एक करके सभी लोग दूर हो गए। विराज बहुत टूट गया और सोचने लगा—”क्या दुनिया में कोई सच्चा अपना नहीं होता?”

हताश होकर वह एक दिन जंगल की ओर निकल पड़ा। वहाँ उसे एक संत मिले। संत ने उसकी उदासी देखकर पूछा, “बेटा, क्यों परेशान हो?”

विराज ने अपनी पूरी कहानी सुनाई और कहा, “गुरुदेव, मुश्किल समय में कोई साथ नहीं देता। अब मैं किस पर भरोसा करूँ?”

संत मुस्कुराए और उसे पास के तालाब तक ले गए। उन्होंने कहा, “इस पानी में कंकड़ फेंको।”

विराज ने कंकड़ फेंका, और पानी में लहरें उठीं। संत बोले, “देखो, लहरें हर दिशा में फैलती हैं, लेकिन कुछ ही देर में शांत हो जाती हैं। यही तुम्हारे जीवन के लोग हैं—सुख में आते हैं, शोर मचाते हैं, और समय के साथ गायब हो जाते हैं।”

फिर संत ने उसे एक कमल का फूल दिखाया और बोले, “अब इस कमल को देखो। यह कीचड़ में रहकर भी साफ और सुंदर है। कुछ लोग ऐसे होते हैं—कम, लेकिन सच्चे। वे मुश्किल समय में भी तुम्हारा साथ नहीं छोड़ते।”

विराज को समझ आ गया। उसने संत से पूछा, “गुरुदेव, मैं ऐसे लोगों को कैसे पहचानूँ?”

संत ने कहा, “जो व्यक्ति तुम्हारे बुरे समय में बिना स्वार्थ के साथ खड़ा रहे, वही तुम्हारा सच्चा संबंध है। बाकी सब समय के साथ बदल जाते हैं।”

उस दिन के बाद विराज ने लोगों की भीड़ के पीछे भागना छोड़ दिया। उसने उन कुछ सच्चे लोगों को पहचाना जो उसके साथ खड़े थे—उसका एक पुराना मित्र, उसकी माँ, और एक ईमानदार सहयोगी।

धीरे-धीरे उसका जीवन फिर से संभलने लगा, लेकिन इस बार वह समझदार था। अब वह रिश्ते संख्या से नहीं, बल्कि सच्चाई से बनाने लगा।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, मुश्किल समय हमें यह सिखाता है कि कौन वास्तव में हमारा अपना है। सही लोगों को पहचानकर उनसे संबंध बनाना ही जीवन की सबसे बड़ी समझदारी है।

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Jeewan Aadhar Editor Desk

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