अमेरिका ने भारत पर काफी भारी टैरिफ लगाकर मुश्किल खड़ी करने का प्रयास किया है लेकिन अमेरिका भूल गया कि भारत देश भगवान श्रीकृष्ण की धरती है। श्रीकृष्ण ने समस्या का समाधान निकालने का सूत्र इस धरा को सौंप रखा है। श्रीकृष्ण की जीवन लीला में अमेरिकन टैरिफ से निपटने की शिक्षा अपने—आप निकल आती है।
श्रीकृष्ण की लीलाएँ अक्सर सूझ-बूझ, प्रेम और साहस का मेल होती हैं—जैसे कि गीता में मार्गदर्शन, रुक्मिणी का समर्थन, या यदुवंश की रक्षा। इन्हें पाँच बड़े बिंदुओं में देख सकते हैं:
परिस्थितियों को समझना और समाधान सूझाना
— श्रीकृष्ण जैसे, भारत ने टैरिफ की चुनौती को पहचाना और तीन-सूत्री योजना बनाई—ये वह चतुराई है।
संवाद और समझौता
— श्रीकृष्ण जैसे पांडवों के पक्ष में बात करते थे, भारत भी अमेरिका के साथ बढ़ी संवाद और व्यापार वार्ता में शामिल हुआ है।
अपने लोगों का संरक्षण
— श्रीकृष्ण ने गोकुल को बचाया, वैसे ही भारत ने श्रम-प्रधान राज्यों और निर्यातकों को समर्थन दिया।
दीर्घकालिक सोच और भरोसेमंद संरचना निर्माण
— जैसे श्रीकृष्ण ने महाभारत में दीर्घकालिक नीति अपनाई, भारत ने भी ₹25,000 करोड़ मिशन जैसे दीर्घकालिक उपाय तैयार किए।
राष्ट्रहित की सर्वोच्च प्राथमिकता
— श्रीकृष्ण ने गीता में धर्म और लोकहित की बात कही, भारत ने भी अमेरिकी टैरिफ के जवाब में राष्ट्रीय हित को हमेशा पहले रखा।
इस प्रकार, श्रीकृष्ण की लीला की तरह, जहाँ उन्होंने अवसर देख कर उसका समाधान खोजा और अपने भक्तों का उत्थान किया, भारत ने भी टैरिफ के प्रभाव को समझ कर, निर्यातकों व रोजगार को बचाने के लिए कई रणनीतियाँ तैयार की हैं—चतुराई, स्थिरता और राष्ट्रहित।
धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, दुनियां में ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका हल भगवान श्रीकृष्ण की जीवन लीला में न मिले। बस, आवश्यकता है श्रीकृष्ण को लीला को ध्यान से जानने की। श्रीकृष्ण हर समस्या का समाधान है और हर सवाल का जवाब है।