धर्म

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से— 871

पुराने समय में एक राजा के राज्य पर उसके शत्रु राज्य ने आक्रमण कर दिया। युद्ध में राजा हार गया। उसके अधिकांश सैनिक मारे गए और शत्रु सेना उसके पीछे पड़ गई। अपनी जान बचाने के लिए राजा जंगल की ओर भागा और एक गहरी गुफा में जाकर छिप गया।

शत्रु सैनिक उसका पीछा करते-करते गुफा तक पहुंच गए। उन्होंने गुफा के अंदर जाकर राजा को खोजा, लेकिन वह उन्हें नहीं मिला। बाहर निकलकर उन्होंने गुफा के मुंह पर बड़े-बड़े पत्थर लगा दिए, ताकि राजा बाहर न निकल सके। सैनिकों को विश्वास था कि अब राजा का अंत निश्चित है।

गुफा के अंदर राजा अकेला, थका हुआ और भूख-प्यास से परेशान बैठा था। चारों ओर अंधेरा था और बाहर निकलने का कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था। धीरे-धीरे उसके मन में निराशा घर करने लगी। उसने सोचा कि अब उसका जीवन यहीं समाप्त हो जाएगा।

इसी बीच उसे अपनी मां की कही हुई एक बात याद आई- “कुछ तो कर, यूं ही मत मर।” यह बात याद आते ही उसके मन में ऊर्जा और सकारात्मकता आ गई। उसने खुद से कहा कि जब तक सांस है, तब तक प्रयास करना चाहिए। बिना कोशिश किए हार मान लेना सबसे बड़ी हार है।

राजा ने हिम्मत जुटाई और गुफा के मुख्य द्वार पर रखे पत्थरों को हटाने का प्रयास शुरू किया। शुरुआत में उसे बहुत कठिनाई हुई, लेकिन उसने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे उसने एक-एक पत्थर को खिसकाना शुरू किया। कई घंटों की मेहनत के बाद उसने बाहर निकलने का एक छोटा सा रास्ता बना लिया।

राजा गुफा से बाहर निकलने में सफल हो गया। बाहर निकलकर वह अपने मित्र राज्य के पास पहुंचा और सहायता मांगी। मित्र राजा की मदद से उसने फिर से सेना तैयार की और शत्रुओं पर आक्रमण किया। इस बार वह पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ लड़ा और अंततः विजय प्राप्त कर अपना राज्य वापस हासिल कर लिया।

धर्मप्रेमी सुंदरसाथ जी, जीवन में कठिन परिस्थितियां सभी के सामने आती हैं, लेकिन जो व्यक्ति आखिरी पल तक प्रयास करता है, वही सफल होता है। जैसे उस राजा ने निराशा के बावजूद कोशिश जारी रखी, वैसे ही हमें भी हर परिस्थिति में उम्मीद बनाए रखनी चाहिए।

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