धर्म

सत्यार्थप्रकाश के अंश—16

विवाहित स्त्री जो विवाहित पति धर्म के अर्थ परदेश गया हो तो आठ वर्ष,विद्या और कीर्ति के लिये गया हो तो छ: और धनादि कामना के लिये गया हो तो तीन वर्ष तक बाट देख के, पाश्चात् नियोग करके सन्तानात्पित्ति कर ले। जब विवाहित पति आवे-तब नियुक्त पति छूट जावे। वैसे ही पुरूष के लिये भी नियम है कि वन्ध्या हो तो आठवे,सन्तान होकर मर जायें तो दशवें ,जब-जब हो तब-तब कन्या ही होवे पुत्र न हो तो गयारहवें वर्ष तक और जो अप्रिय बोलने वाली हो तो सद्य: उस स्त्री को छोड़ के दूसरी स्त्री से नियोग करके सन्तानोत्पत्ति कर लेवे।जीवन आधार प्रतियोगिता में भाग ले और जीते नकद उपहार

वैसे ही जो पुरूष अत्यन्त दु:खदायक हो तो स्त्री को उचित है कि उस को छोड़ के दूसरे से नियोग कर सनतानोत्पत्ति करके उसी विवाहित पति के दायभागी सन्तानोत्पत्ति कर लेवे। इत्यादि प्रमाण और युक्तियों से स्वयंवर विवाह और नियोग से अपने-अपने कुल की उन्नति करे। जैसा औरस अर्थात् नियोग से उत्पन्न हुआ पुत्र पिता के दायभागी होते हैं।जीवन आधार न्यूज पोर्टल के पत्रकार बनो और आकर्षक वेतन व अन्य सुविधा के हकदार बनो..ज्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक करे।
अब इस पर स्त्री और पुरूष को ध्यान रखना चाहिये कि वीर्य और रज को अमूल्य समझें। जो कोई इस अमूल्य पदार्थ को परस्त्री,वेश्या वर दुष्ट पुरू षों के संग में खोते है वे महामूर्ख होते हैं। क्योंकि किसान वा माली मूर्ख होकर भी अपने खेत वा वाटिका के विना अन्यत्र बीज नहीं बोते। जो कि साधारण बीज और मूर्ख का ऐसा वर्तमान है जो सर्वोत्तम मनुष्यशरीर रूप वृक्ष के बीज को कुक्षेत्र में खोता है वह महामूर्ख कहाता है, क्योंकि उस का फल उस को नहीं मिलता और आत्मा वै जायते पुत्र यह ब्राह्मण ग्रन्थ का वचन है।
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