हिसार

भक्ति मार्ग पर चलकर ​परमात्मा को पाना सुगम—स्वामी सदानंद

आदमपुर,
परमात्मा को प्राप्त करने के मनिषियों ने कई मार्ग बताए हैं। जिसमे भक्ति मार्ग सबसे सरल, सहज और सबके लिए सुलभ मार्ग है। यह बात प्रणामी मिशन के प्रमुख संत सदानंद महाराज ने मॉडल टाउन में आयोजित सत्संग में श्रद्धालुओं को प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि परमात्मा को प्राप्त करने के मुख्यत: तीन मार्ग बताए गए हैं। पहला योग मार्ग, इसमें साधक को अष्टांग मार्ग का अनुकरण करना पड़ता है। ये सभी मार्ग कठोर साधना के विषय है।

इसमें जब व्यक्ति निर्विकल्प समाधि के स्थिति में पहुंचता है तो उसे परमात्मा का सानिध्य प्राप्त होता है। यदपि यह मार्ग प्रत्यक्ष अनुभूति का मार्ग है। लेकिन काफी कठिन है जो निरन्तर और सतत प्रयास से हीं संभव है। दूसरा मार्ग ज्ञान मार्ग है इसमें साधक को परमात्मा को प्राप्त करने के लिए या जानने के लिए विशेष अंतर्दृष्टि की आवश्यकता होती है। इस विशेष अंतर्दृष्टि को प्राप्त करने के लिए सबसे पहले किसी योग्य गुरु की आवश्यकता होती है।

अतः इस मार्ग में परनिर्भरता का भाव है। यहां स्वाध्याय को महत्वपूर्ण माना गया है। इस मार्ग में साधक परमात्मा को जान तो सकता है लेकिन परमात्मा को जानना काफी कठिन है। तीसरा मार्ग भक्ति मार्ग है। यह मार्ग सगुण ईश्वर को मानता है। यहां साधक बिना किसी के सहयोग से स्वयं के प्रयास से ईश्वर को प्राप्त कर सकता है। यहां न तो किसी गुरु की आवश्यकता है और न ही किसी विशेष अंतर्दृष्टि की।

यहां पर परमात्मा के प्रति अनन्य भक्ति ही उसको प्राप्त करने का मार्ग है। यह सबके लिए सुलभ मार्ग है। इसलिए इस मार्ग की महत्ता अधिक हो जाती है। इस अवसर पर सहदेव गोयल, किशोर गोयल, रमेश गोयल, अशोक सिसवालिया, भाल सिंह, राकेश शर्मा, पुरुषोत्तम राणा, सीए नवीन अग्रवाल, रामबिलास गोयल, सुभाष प्रणामी, रामचंद्र शर्मा सहित काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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