धर्म

स्वामी राजदास : अहंकार और पद

हर व्यक्ति राष्ट्रपति हो जाना चाहता है। हर व्यक्ति प्रधानमंत्री हो जाना चाहता है। अब साठ करोड़ के देश में एक आदमी प्रधानमंत्री होगा। एक को छोडक़र बाकी तो दुखी होने वाले हैं। और बाकी बदला भी लेने वाले है। इसलिए जो व्यक्ति पद पर पहुंच जाता है, उसे जनता कभी क्षमा नहीं करती। कर नहीं सकती। पद पर जब तक रहता है, तब तक जी-हजूरी करती है, क्योंकि करना पड़ता है। पद से उतरते ही जूते फिंकने शुरू हो जाते हैं।
और तुम मजा देखना, ऐसे व्यक्तियों पर जूते फिंक जाते हैं जिनकी तुम सोच भी नहीं सकते थे। जो कल दूसरों पर जूते फिंकवाते रहे थे, जो कल तक जूता फेंकने वालों के सरदार थे- उन पर जूते फिंक जाते हैं। जैसे ही तुम्हारे हाथ में सत्ता आती है, तुम्हारे साथ जितने लोग चल रहे थे सत्ता की तालश में, वे सब नाराज हो जाते हैं। जब तक तुम्हारे हाथ में सत्ता रहेगी तब तक झुक-झुक कर नमस्कार करेंगे। करना पड़ेगा। जिसकी लाठी उसकी भैंस। लेकिन जिस दिन तुम्हारी लाठी छिन जायेगी, उस दिन तुम्हं पता चलेगा कि तुम्हारा कोई मित्र नहीं। उस दिन जिन्होंने तुम्हें सहारा दिया था कल तक, तुम्हें पद-प्रतिष्ठा तक पहुंचाया था, वे ही तुम्हारे शत्रु हो जायेंगे। जो तुम्हारी स्तुति करते थे, वे ही तुम्हें गालियां देने लगेंगे।
स्कूली प्रतियोगिता.. प्ले ग्रुप से दसवीं तक विद्यार्थी और स्कूल दोनों जीतेंगे सैंकड़ों उपहार.. अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करे
क्या कारण है इसके पीछे? कारण साफ है। पद थोड़े हैं। अब कोई यह पूछ सकता है तो पद ज्यादा क्यों नहीं हैं? पद ज्यादा हो सकते हैं, लेकिन तब उनमें मजा चल जाता है। जैसे घोषणा कर दी जाए कि हिन्दूस्तान में सभी लोग राष्ट्रपति हैं। मगर तब उसका मजा चला जायेगा। उसका मजा ही इसमें हैं कि जितना थोड़ा हो, जितना न्यून हो, उतना ही मजा है।
जीवन आधार न्यूज पोर्टल को आवश्यकता है पत्रकारों की…यहां क्लिक करे और पूरी जानकारी ले..
समझो कि कोहिनूर हीरे रास्तो पर पड़े हो, कंकड़ पत्थरों की तरह, तो बस व्यर्थ हो गए। फिर इंग्लैड की महारानी के राज मुकुट में लगाए रखने की कोई जरूरत नहीं रह जाएगी। फिर तो कोई भी राह के किनारे से उठा ले। कंकड़-पत्थरों का मूल्य क्यों नहीं है, जरा सोचा, दुनिया में अगर एक ही कंकड़ ही हैं, बस वे न्यून हैं। कुरूप, तो किसी राजमुकुट में जड़ा जाता। हीरे भी कंकड़ ही है , बस वे न्यून यही उनकी खूबी है। सोने और पीतल में और कुछ भेद नहीं है, पीतल ज्यादा है, और सोना न्यून है। जो चीज न्यून है, वह अंहकार को बलवती बनाती है। मेरे पास अहंकार को मजा आने लगता है। अब तुम आखिरी शिखर पर पहुंच जाते हो, जहां तुम अकेले हो और कोई भी नहीं, तब अहंकार को बड़ा रस आता है।
नौकरी करना चाहते है, तो यहां क्लिक करे।

लेकिन जब न्यून छीन जाता है तो जनता उस अहंकारी को सबक भी सिखाती है और अतीत में ऐसा हुआ भी है। इसलिए जब आपके पास पद तो जनसेवा करो, जनसेवक बनकर चलो। लोग सदा के लिए आपके बन जायेंगे। अहंकार को पास मत फटकने दो, लोग आपकी स्तुति करेंगे।
जीवन आधार बिजनेस सुपर धमाका…बिना लागत के 15 लाख 82 हजार रुपए का बिजनेस करने का मौका….जानने के लिए यहां क्लिक करे

Related posts

परमहंस संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से— 486

स्वामी राजदास : लालच बुरी बला है

Jeewan Aadhar Editor Desk

परमहंस स्वामी सदानंद जी महाराज के प्रवचनों से-15

Jeewan Aadhar Editor Desk