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पिता का आरोप, अस्पताल की लापरवाही से गई बेटी की जान, शव देने से पहले मांगे 9 लाख

नई दिल्ली,
कुछ दिनों में ही दिल्ली एनसीआर के कई अस्पतालों में लापरवाही के मामले सामने आए हैं। शालीमार बाग स्थित मैक्स हॉस्पिटल द्वारा एक बच्चे को मृत बताकर पार्सल करने के मामले में दिल्ली सरकार ने उसका लाइसेंस कैंसल कर दिया है। इसी बीच एक शख्स ने करोल बाग के बीएल कपूर अस्पताल पर आरोप लगाया है कि डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से उनकी बेटी को जान गंवानी पड़ी। परिजनों का सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब उन्होंने बच्ची की बॉडी मांगी, तो डॉक्टरों ने पहले साढ़े 9 लाख रुपये का बिल भरकर आने को कहा और तब तक बॉडी हैंडओवर करने से इनकार कर दिया। अब परिजन इस मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं, वहीं अस्पताल का पक्ष अब तक सामने नहीं आया है। नौकरी की तलाश है..तो यहां क्लिक करे।
नीरज गर्ग नाम के इस शख्स का कहना है कि इस अस्पताल में उनकी बच्ची की ट्रांसप्लांट सर्जरी की गई थी। उन्होंने कहा, ‘कुछ दिनों बाद ही उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। सिर में तेज दर्द भी रहता था। लेकिन डॉक्टर कहते रहे कि सब कुछ सामान्य है।’ जीवन आधार प्रतियोगिता में भाग ले और जीते नकद उपहार
गर्ग का कहना है कि कुछ दिन बाद डॉक्टरों ने कहा कि बच्ची को इन्फेक्शन की वजह से ICU में शिफ्ट करना पड़ेगा। बच्ची के पिता गर्ग ने बताया, ‘सबसे ज्यादा हैरान करने वाला था कि डॉक्टरों ने कहा, सांस लेने में दिक्कत की वजह से मेरी बेटी को वेंटिलेटर में शिफ्ट करना होगा और यह नॉर्मल प्रॉसेस है। इसके बाद 25 नवंबर को उसकी मौत हो गई। अब वह कभी वापस नहीं आएगी।’ गर्ग अस्पताल से अपनी बेटी की मौत का जवाब मांग रहे हैं। उनका कहना है कि इसमें अस्पताल की गलती है।
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वैसे तो बच्ची के परिजनों ने अभी तक इस बाबत किसी भी फोरम में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन पिता का आरोप है कि अस्पताल ने जिस तरह से उन्हें अंधेरे में रखा और बच्ची की मौत के बाद उसकी बॉडी देने से इनकार करते हुए पहले साढ़े 9 लाख रुपये का बिल भरकर आने को कहा, उससे उन्हें काफी तकलीफ पहुंची है। इसीलिए अब इस मामले में वह न्याय चाहते हैं। उनका यह भी कहना है कि अस्पताल ने काफी लापरवाही बरती और उन्हें मौत की वास्तविक वजह के बारे में भी नहीं बताया। आईएमए के प्रेजिडेंट डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा है कि अगर अस्पताल ने पेमेंट क्लियर किए बिना बॉडी हैंडओवर करने से इनकार किया है, तो फिर इसमें अस्पताल की गंभीर गलती है। कोई भी अस्पताल बिल क्लियर कराने के नाम पर मृतक की बॉडी को परिवार को सौंपने करने से इनकार नहीं कर सकता।
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